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लगा भूत प्रेतों से मुक्ति का मेला...एक डूबकी ही काफी है
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 27 Jun 2017 08:31 PM IST
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इस कुंड में लगाई डूबकी
- फोटो : अमर उजाला
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तीर्थराज पुष्कर से कुछ दूर स्थित एक अन्य तीर्थस्थल पर मंगलवार का नजारा अनोखा था। यूं कहें यहां एक खास मेला लगा। इस मेले में बड़ी संख्या में लोग लोग भूत—प्रेत जैसी व्याधियों से मुक्ति पाने पहुंचे।
इस दौरान यहां पूजा अर्चना हुई और खास मुहूर्त में कुंड में स्नान कर प्रेत आत्माओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना भी की गई। यह तीर्थस्थल सुधाबाय गया कुण्ड है। जहां हर साल मंगला चतुर्थी को यह मेला आयोजित होता है।
सुधाबाय में स्नान करने के लिए श्रद्धालु का आना अलसुबह से ही शुरु हो जाता है। यहां मान्यता है कि चतुर्थी तिथि और मंगलवार होने पर गया माता स्वयं इस कुण्ड में विद्यमान रहती है। इस दिन यहां स्नान करने से अदृश्य आत्माओं से छुटकारा मिलता है। इस दिन पूर्वजों और पितरों का श्राद्ध तर्पण करने का भी विशेष महत्व रहता है।
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इस दौरान यहां पूजा अर्चना हुई और खास मुहूर्त में कुंड में स्नान कर प्रेत आत्माओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना भी की गई। यह तीर्थस्थल सुधाबाय गया कुण्ड है। जहां हर साल मंगला चतुर्थी को यह मेला आयोजित होता है।
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सुधाबाय में स्नान करने के लिए श्रद्धालु का आना अलसुबह से ही शुरु हो जाता है। यहां मान्यता है कि चतुर्थी तिथि और मंगलवार होने पर गया माता स्वयं इस कुण्ड में विद्यमान रहती है। इस दिन यहां स्नान करने से अदृश्य आत्माओं से छुटकारा मिलता है। इस दिन पूर्वजों और पितरों का श्राद्ध तर्पण करने का भी विशेष महत्व रहता है।
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राम ने प्रवाहित किए थे दशरथ के पिंड
अात्मा
भगवान राम ने पिता दशरथ की मृत्यु के बाद पिंड गया कुण्ड में प्रवाहित किए थे। इसके बाद दशरथ की आत्मा को शांति मिली थी।
इस मान्यता के चलते सुधा बाय कुण्ड में लोग स्नान और पूजा करने आते है। गया कुण्ड के पानी से छूने मात्र से ही यातनाएं देने वाली आत्माएं मनुष्य के शरीर को छोड़ देती है।
इस मान्यता के चलते सुधा बाय कुण्ड में लोग स्नान और पूजा करने आते है। गया कुण्ड के पानी से छूने मात्र से ही यातनाएं देने वाली आत्माएं मनुष्य के शरीर को छोड़ देती है।