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पैंथर का हमला, वन विभाग को देना पड़ा दो लाख का 'मौताणा'
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 01 Jul 2017 06:34 PM IST
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मुआवजे के मांग लिए बड़ी संख्या में जुटे गांव वाले
- फोटो : अमर उजाला
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वन विभाग को पैंथर के हमले में मारे गए एक आदिवासी के परिवार को दो लाख का 'मौताणा' चुकाना पड़ा।
मामला उदयपुर के गिर्वा तहसील के सरू इलाके का है। यहां चार दिन पहले एक पैंथर ने एक आदिवासी युवक पर हमला कर दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई। इस मामले में पांच लाख रुपए के 'मौताणा' की मांग को लेकर आदिवासी वन विभाग के कार्यालय पर एकत्र हो गए। दरसअल 'मौताणा' आदिवासियों की एक प्रथा है। इसमें मृतक की मौत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति से मुआवजे की मांग की जाती है। ये मांग पूरी नहीं होने तक मृतक का अंतिम संस्कार भी नहीं किया जाता। राजस्थान के आदिवासी इलाकों में यह 'मौताणा' के काफी मामले सामने आते है। सड़क हादसे या अन्य वजह से किसी आदिवासी की मौत हो जाती है तो समाज के लोग शव लेकर प्रदर्शन करते है और 'मौताणा' मिलने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार किया जाता है।
इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। पैंथर के हमले में मारे गए युवक का शव लेकर आदिवासियों ने वन विभाग के दफ्तर पर प्रदर्शन किया। वे तब तक नहीं मानें जब तक उनकी 'मौताणा' की मांग पूरी नहीं हुई। हालांकि समझाइश के बाद पांच लाख रुपए 'मौताणा' की यह मांग का यह मामला दो लाख रुपए देने पर सुलझा।
दूसरी तरफ वन विभाग का कहना है कि नियमों में 'मौताणा' देने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में यह राशि वन्यजीव के हमले के दौरान होने वाले मुआवजे के तौर पर दी गई है। वन विभाग ने मुआवजे के तौर पर दो लाख रुपए का चेक परिजनों को सौंप दिया गया है। इसके बाद परिजन शव लेकर चले गए।
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मामला उदयपुर के गिर्वा तहसील के सरू इलाके का है। यहां चार दिन पहले एक पैंथर ने एक आदिवासी युवक पर हमला कर दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई। इस मामले में पांच लाख रुपए के 'मौताणा' की मांग को लेकर आदिवासी वन विभाग के कार्यालय पर एकत्र हो गए। दरसअल 'मौताणा' आदिवासियों की एक प्रथा है। इसमें मृतक की मौत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति से मुआवजे की मांग की जाती है। ये मांग पूरी नहीं होने तक मृतक का अंतिम संस्कार भी नहीं किया जाता। राजस्थान के आदिवासी इलाकों में यह 'मौताणा' के काफी मामले सामने आते है। सड़क हादसे या अन्य वजह से किसी आदिवासी की मौत हो जाती है तो समाज के लोग शव लेकर प्रदर्शन करते है और 'मौताणा' मिलने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार किया जाता है।
इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। पैंथर के हमले में मारे गए युवक का शव लेकर आदिवासियों ने वन विभाग के दफ्तर पर प्रदर्शन किया। वे तब तक नहीं मानें जब तक उनकी 'मौताणा' की मांग पूरी नहीं हुई। हालांकि समझाइश के बाद पांच लाख रुपए 'मौताणा' की यह मांग का यह मामला दो लाख रुपए देने पर सुलझा।
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दूसरी तरफ वन विभाग का कहना है कि नियमों में 'मौताणा' देने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में यह राशि वन्यजीव के हमले के दौरान होने वाले मुआवजे के तौर पर दी गई है। वन विभाग ने मुआवजे के तौर पर दो लाख रुपए का चेक परिजनों को सौंप दिया गया है। इसके बाद परिजन शव लेकर चले गए।
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