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पानी का कहर:नदी बन गया बस स्टैंड, ओवरफ्लो झील ने दिखाया रौद्र रूप
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 17 Sep 2017 04:44 PM IST
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बस स्टैंड में बहता राजसमंद झील का पानी
- फोटो : amar ujala
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करीब आधी शताब्दी से खाली पड़ी राजसमंद झील के भरने के साथ ही उसके पेटे और अपवाह क्षेत्र में किए गए अतिक्रमणों की पोल खुल कर सामने आ गई है। वहीं झील की पेटा काश्त जमीन पर खेती करने वाले किसानों के लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वांसोल में झील पर चादर चलती देखने के लिए रोज लोगों का हुजूम उमड़ रहा है।
इधर मोही गांव के चैक में पानी भरने से ग्रामीण परेशान है। मोही के बीच से राजसमंद का पानी निकल रहा है। यूं कहे कि वर्तमान में मोही राजसमंद से निकलने वाली नदी के पेटे में बस गया है। इसका बस स्टैंड पूरी तरह से नदी में तब्दील हो गया है।
झील को छलकता देखने के लिए राजनगर-कांकरोली के निकट के सभी क्षेत्रों यहां तक की उदयपुर से भी लोग पहुंच रहे हैं। वहीं नौचैकी की छतरियों में पानी आने के बाद राजसमंद किसी समुद्र से कम नजर नहीं आ रहा है। द्वारिकाधीश मंदिर परिसर में बने घाट की छटा भी बदल गई है। वहां पर सीढ़ियों पर पानी छू गया है। इससे कांकरोली शहर के लोग अब वहां तैराकी करने और नहाने के लिए पहुंचने लगे हैं।
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इधर मोही गांव के चैक में पानी भरने से ग्रामीण परेशान है। मोही के बीच से राजसमंद का पानी निकल रहा है। यूं कहे कि वर्तमान में मोही राजसमंद से निकलने वाली नदी के पेटे में बस गया है। इसका बस स्टैंड पूरी तरह से नदी में तब्दील हो गया है।
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झील को छलकता देखने के लिए राजनगर-कांकरोली के निकट के सभी क्षेत्रों यहां तक की उदयपुर से भी लोग पहुंच रहे हैं। वहीं नौचैकी की छतरियों में पानी आने के बाद राजसमंद किसी समुद्र से कम नजर नहीं आ रहा है। द्वारिकाधीश मंदिर परिसर में बने घाट की छटा भी बदल गई है। वहां पर सीढ़ियों पर पानी छू गया है। इससे कांकरोली शहर के लोग अब वहां तैराकी करने और नहाने के लिए पहुंचने लगे हैं।
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तो बन जाएंगे बाढ़ जैसे हालात
ओवरफ्लो झील को देखने पहुंचे स्थानीय लोग
- फोटो : amar ujala
अगर राजसमंद का जलस्तर अब बढ़ता है तो संकट गहरा सकता है। झील ने अभी भी अपना मैग्जिमम टैंक लेवल (एमटीएल) नहीं छुआ है। अगर आने वाले दिनों में और बारिश होती है और झील मैग्जिमम टैंक लेवल तक भरती है तो हालात बाढ़ से भी अधिक भयावह हो सकते हैं।
ऐसे में प्रशासन की ओर से आंखे मूंद कर रहना भी झील पेट में और उससे सटे इलाकों में बसे लोगों और व्यवसायियों के लिए गले की फांस बन सकता है। जैसे-जैसे झील एमटीएल को छुएगी इसका बैकवाॅटर केलवा तक फैलने की आशंका है। ऐसे में कई मार्बल खदानें तक इसके पानी में डूब सकती हैं।
ऐसे में प्रशासन की ओर से आंखे मूंद कर रहना भी झील पेट में और उससे सटे इलाकों में बसे लोगों और व्यवसायियों के लिए गले की फांस बन सकता है। जैसे-जैसे झील एमटीएल को छुएगी इसका बैकवाॅटर केलवा तक फैलने की आशंका है। ऐसे में कई मार्बल खदानें तक इसके पानी में डूब सकती हैं।