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मेहमानों को होटलवालों ने पहले करवाया चेक आउट, फिर करवाया चेक इन
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 01 Jul 2017 06:46 PM IST
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जीएसटी लागू होने के बाद राजस्थान में मिला जुला असर देखने को मिला। जीएसटी का जमकर विरोध करने वाले कपड़ा व्यापारी दुकानों पर लौटे, लेकिन मार्बल व्यवसायी बेमियादी हड़ताल पर चले गए। उधर, मूर्तिकला लघु उद्योग मंडल संस्थान की ओर से बेमियादी हड़ताल जारी है।
कई व्यवसाइयों ने जीएसटी लागू करने में परेशानी नहीं हो, तो इसके भी उपाय किए। जिसमें होटल व्यवसासियों ने दो या उससे अधिक दिन रुके मेहमानों को 30 को चेक आउट करवाकर और आज फिर चेक इन दिखाया, जिससे जीएसटी के अनुसार बिल बना सकें। इधर, इलेक्ट्रानिक आइटम्स की रेट में अंतर आ गया है।
जीएसटी लागू होने के बाद राजस्थान में व्यापारियों का धरना प्रदर्शन एकबारगी तो ठंडा पड़ गया। व्यापारियों ने दुकानें खोली तो सही लेकिन बिना पूरी तैयारी के असमंजस की स्थिति में रहे।
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बड़े बाजार के नाम से जाने जाने वाले बिग बाजार, रिलायंस फ्रेश, ईजी डे, विशाल मेगा मार्ट, नेशनल हेंडलूम्स जैसी जगह में जीएसटी के अनुसार जो वस्तु सस्ती थी, उन्हें सस्ता किया गया और जो महेगी हो गई, उनकी बिलिंग उसी अनुसार की। लेकिन बाजारों और कॉलोनियों की दुकानों में लोगों को वस्तुओं की रेट में कोई अंतर नहीं लगा।
बजाज नगर निवासी रजनीश शर्मा ने बताया कि उन्हें घर के आस-पास की दुकानों से आज खरीदार की लेकिन उन्हें कच्ची पर्ची ही मिली। साथ ही, पास की दूसरी दुकान से बचे सामान की खरीदारी की, तो कच्ची पर्ची भी नहीं मिली।
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कई व्यवसाइयों ने जीएसटी लागू करने में परेशानी नहीं हो, तो इसके भी उपाय किए। जिसमें होटल व्यवसासियों ने दो या उससे अधिक दिन रुके मेहमानों को 30 को चेक आउट करवाकर और आज फिर चेक इन दिखाया, जिससे जीएसटी के अनुसार बिल बना सकें। इधर, इलेक्ट्रानिक आइटम्स की रेट में अंतर आ गया है।
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जीएसटी लागू होने के बाद राजस्थान में व्यापारियों का धरना प्रदर्शन एकबारगी तो ठंडा पड़ गया। व्यापारियों ने दुकानें खोली तो सही लेकिन बिना पूरी तैयारी के असमंजस की स्थिति में रहे।
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बड़े बाजार के नाम से जाने जाने वाले बिग बाजार, रिलायंस फ्रेश, ईजी डे, विशाल मेगा मार्ट, नेशनल हेंडलूम्स जैसी जगह में जीएसटी के अनुसार जो वस्तु सस्ती थी, उन्हें सस्ता किया गया और जो महेगी हो गई, उनकी बिलिंग उसी अनुसार की। लेकिन बाजारों और कॉलोनियों की दुकानों में लोगों को वस्तुओं की रेट में कोई अंतर नहीं लगा।
बजाज नगर निवासी रजनीश शर्मा ने बताया कि उन्हें घर के आस-पास की दुकानों से आज खरीदार की लेकिन उन्हें कच्ची पर्ची ही मिली। साथ ही, पास की दूसरी दुकान से बचे सामान की खरीदारी की, तो कच्ची पर्ची भी नहीं मिली।
गृहणियों बोलीं - हमें नहीं मिला सामान सस्ता, कोई फर्क नहीं आया नजर
गृहणी नीतू जैन
- फोटो : अमर उजाला
दुर्गापुरा निवासी गृहणी नीतू जैन के अनुसार मोहल्ले की दुकानों से खरीदे गए घरेलू सामान में पहले दिन किसी तरह का अंतर नहीं नजर आया। जब दुकानदार से कहा कि जीएसटी में सामान सस्ता हुआ है, तो वह बोला कि पुराने रेट से खरीदा गया सामान है, सस्ता कैसे दे दूं।
अर्जुन नगर निवासी रेखा गुप्ता ने कहा कि घरेलू सामान लेने में कच्ची बिलिंग ही होती है, तो उसका फर्क पता ही नहीं चला। कपड़ा व्यापारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि पहले दिन कपड़ा व्यापार तो बिल्कुल ठंडा रहा है, केवल उम्मीद लगा सकते हैं कि जल्द ही व्यापार गति पकड़ेगा।
राजस्थान कपड़ा जीएसटी संघर्ष समिति के संयोजक सुरेश सैनी ने बताया कि पचास फीसदी व्यापारियों के पास रजिस्ट्रेशन नहीं है, न ही उनके पास कम्प्यूटर सिस्टम हैं। व्यापारी आधी तैयारियों से असंतुष्ट हैं। पहले दिन व्यापार न के बराबर हुआ, सामान्य होने में भी समय लगेगा।
व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी लागू हुआ है, अब समझ आने और व्यापार में पूरी तरह लागू होने में कुछ एक महीने तो लगेंगे। उपभोक्ताओं को छोटे व्यापारियों की ओर से दी जा रही स्कीम एकबारगी या तो कम कर दी गई या बंद कर दी है।
अर्जुन नगर निवासी रेखा गुप्ता ने कहा कि घरेलू सामान लेने में कच्ची बिलिंग ही होती है, तो उसका फर्क पता ही नहीं चला। कपड़ा व्यापारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि पहले दिन कपड़ा व्यापार तो बिल्कुल ठंडा रहा है, केवल उम्मीद लगा सकते हैं कि जल्द ही व्यापार गति पकड़ेगा।
राजस्थान कपड़ा जीएसटी संघर्ष समिति के संयोजक सुरेश सैनी ने बताया कि पचास फीसदी व्यापारियों के पास रजिस्ट्रेशन नहीं है, न ही उनके पास कम्प्यूटर सिस्टम हैं। व्यापारी आधी तैयारियों से असंतुष्ट हैं। पहले दिन व्यापार न के बराबर हुआ, सामान्य होने में भी समय लगेगा।
व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी लागू हुआ है, अब समझ आने और व्यापार में पूरी तरह लागू होने में कुछ एक महीने तो लगेंगे। उपभोक्ताओं को छोटे व्यापारियों की ओर से दी जा रही स्कीम एकबारगी या तो कम कर दी गई या बंद कर दी है।