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माउंट आबू: जंगल खाक, अब घरों की ओर आग
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 17 Apr 2017 09:15 PM IST
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माउंट आबू में पहाड़ियों पर भीषण आग
- फोटो : Vishnu Sharma
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राजस्थान का एकमात्र पहाड़ी पर्यटन स्थल माउंट आबू में चार दिन से आग भड़की हुई है। वायु सेना के हेलीकॉप्टरों के साथ 600 से ज्यादा सेना व पुलिस के जवानों राहत कार्यों मे जुटे होने के बाद आग अब रिहायशी ईलाके तक पहुंच गई है।
आग इतनी भयावह है कि करीब 20 किलोमीटर का जंगल पूरी तरह से जल गया है। आग कई किलोमीटर इलाके में फैली हुई है। आग पर काबू पाने के लिए गोरखा रेजीमेंड के जवानों को भी बुलाया गया है। इन्होंने रिहायशी इलाकों से आग दूर रखने के लिए प्रभावित क्षेत्र में फायर लाइन बना दी गई है। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय से राहत कार्यों की मॉनिटरिंग की जा रही है। आग के कारण माउंट आबू की घाटी धूएं से भर गर्इ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले तीस वर्षों में ऐसी भयावह आग उन्होंने कभी नहीं देखी है। लोगों का कहना है कि तीस साल में माउंट आबू में करीब 800 आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। आग को लेकर स्थानीय लोग डरे हुए हैं।
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नक्की झील है बंद
आग के चलते माउंट आबू में इन दिनों सब बंद है। घाटी का रास्ता प्रभावित होने के कारण सैलानी यहां तक पहुंच नहीं पा रहें है। वहीं सुरक्षा कारणों से नक्की झील को भी बंद कर दिया गया है। आग की शुरुआत बृहस्पतिवार को हुई, लेकिन राहत व बचाव के कार्यों में तेजी शुक्रवार शाम तक ही आ सकी थी। आग पहाड़ी क्षेत्रों में होने के कारण वायु सेना के दो हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में पुलिस व प्रशासन के अधिकारी माउंट आबू में डेरा जमाए बैठे है।
यह रहते है प्रमुख कारण
जंगल विशेषज्ञ बताते है कि माउंट आबू के जंगलों में आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। लेकिन इस बार लगी आग काफी विकराल हैं। यहां आग लगने के जो कारण है उनमें प्रमुख है इस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी लोगों की लापरवाही। इसके अतिरिक्त यहां बांस के पेड़ों की बहुतायता है। गर्मी में बांस में घर्षण के कारण भी आग लग जाती हैं। इसके अतिरिक्त अरावली की चट्टान जल्द ही गर्म हो जाती है जिसके कारण भी आग लगती है।
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आग इतनी भयावह है कि करीब 20 किलोमीटर का जंगल पूरी तरह से जल गया है। आग कई किलोमीटर इलाके में फैली हुई है। आग पर काबू पाने के लिए गोरखा रेजीमेंड के जवानों को भी बुलाया गया है। इन्होंने रिहायशी इलाकों से आग दूर रखने के लिए प्रभावित क्षेत्र में फायर लाइन बना दी गई है। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय से राहत कार्यों की मॉनिटरिंग की जा रही है। आग के कारण माउंट आबू की घाटी धूएं से भर गर्इ है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले तीस वर्षों में ऐसी भयावह आग उन्होंने कभी नहीं देखी है। लोगों का कहना है कि तीस साल में माउंट आबू में करीब 800 आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। आग को लेकर स्थानीय लोग डरे हुए हैं।
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नक्की झील है बंद
आग के चलते माउंट आबू में इन दिनों सब बंद है। घाटी का रास्ता प्रभावित होने के कारण सैलानी यहां तक पहुंच नहीं पा रहें है। वहीं सुरक्षा कारणों से नक्की झील को भी बंद कर दिया गया है। आग की शुरुआत बृहस्पतिवार को हुई, लेकिन राहत व बचाव के कार्यों में तेजी शुक्रवार शाम तक ही आ सकी थी। आग पहाड़ी क्षेत्रों में होने के कारण वायु सेना के दो हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में पुलिस व प्रशासन के अधिकारी माउंट आबू में डेरा जमाए बैठे है।
यह रहते है प्रमुख कारण
जंगल विशेषज्ञ बताते है कि माउंट आबू के जंगलों में आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। लेकिन इस बार लगी आग काफी विकराल हैं। यहां आग लगने के जो कारण है उनमें प्रमुख है इस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी लोगों की लापरवाही। इसके अतिरिक्त यहां बांस के पेड़ों की बहुतायता है। गर्मी में बांस में घर्षण के कारण भी आग लग जाती हैं। इसके अतिरिक्त अरावली की चट्टान जल्द ही गर्म हो जाती है जिसके कारण भी आग लगती है।