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छठीं तक पढ़े युवक ने बनाई ऐसी मशीन, जो खेती करेगी आसान
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 05 Jul 2017 06:27 PM IST
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बाबूलाल
- फोटो : amar ujala
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छठीं क्लास तक पढ़े एक युवक ने खेती को आसान कर दिया है। ऐसा उसने एक मशीन बनाने के बाद किया है। इस मशीन की सहायता से जुताई, बुवाई और कटाई तीनों काम आसानी से हो सकते हैं।
यह युवक है उदयपुर के मावली उपखण्ड की ग्राम पंचायत पलानाकलां के प्रकाशपुरा गांव का रहने वाला बाबूलाल गायरी। बाबूलाल ने विभिन्न मशीनों को जोड़कर एक रोबोटिक कृषि मशीन तैयार की है जो बुवाई के साथ ही खरपतवार को भी काटने का काम करती है। मशीन खेती के हिसाब से मल्टीपरपज बताई जा रही है। यह मशीन दवाई स्प्रे, मिनी कल्टी, मिनी ट्रॉली, बीज बोने की कल्टी, पानी रोकने के लिए पाळी बनाने का काम भी करेगी।
साथ ही, इसमें लोहे के औजारों की धार दुरूस्त करने का साधन भी लगाया गया है। इस मशीन को बनाने के लिए बाबूलाल ने इसमें स्कूटर के टायर और गन्ने का जूस निकालने की मशीन का इंजन लगाया है।
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यह युवक है उदयपुर के मावली उपखण्ड की ग्राम पंचायत पलानाकलां के प्रकाशपुरा गांव का रहने वाला बाबूलाल गायरी। बाबूलाल ने विभिन्न मशीनों को जोड़कर एक रोबोटिक कृषि मशीन तैयार की है जो बुवाई के साथ ही खरपतवार को भी काटने का काम करती है। मशीन खेती के हिसाब से मल्टीपरपज बताई जा रही है। यह मशीन दवाई स्प्रे, मिनी कल्टी, मिनी ट्रॉली, बीज बोने की कल्टी, पानी रोकने के लिए पाळी बनाने का काम भी करेगी।
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साथ ही, इसमें लोहे के औजारों की धार दुरूस्त करने का साधन भी लगाया गया है। इस मशीन को बनाने के लिए बाबूलाल ने इसमें स्कूटर के टायर और गन्ने का जूस निकालने की मशीन का इंजन लगाया है।
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समस्याएं सामने आई तो ऐसे बना दिया जुगाड़
बाबूलाल
- फोटो : amar ujala
बाबूलाल गरीबी के कारण कक्षा छठीं तक ही पढ़ाई कर सका। सन् 2001 में पढ़ाई छोड़कर वह खेती करने लगा। इसी दौरान उसे खेत में आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए एक यंत्र बनाने का विचार आया। जिसके चलते वह धीरे-धीरे छोटी-छोटी मशीन जोड़कर साधन बनाने लगा। आखिरकार उसे यह मशीन बनाने में सफलता मिली।
बाबूलाल ने बताया कि पढ़ाई छोड़ने के बाद खेती के साथ-साथ ऐसी मशीनरी के कुछ पार्ट्स जोड़कर हल में सुधार किया। इसके बाद मशीनों से जुगाड़ कर हाल ही में खेत में बुवाई की मशीन बनाई। जिसे देखने मे ऐसा लगता है जैसे किसी इंजीनियर ने इसे बनाया हो। इस मशीन को बनाने से पहले एक लकड़ी के पटिये पर इंजन लगाकर परीक्षण किया।
परीक्षण सफल होने के बाद मशीन बनाने के लिए करीब एक माह का समय लगा। बाबूलाल ने सबसे पहले एक पुस्तक में सभी पार्ट्स को अरेंज करने के लिए नक्शा बनाया। इसके बाद जैसे-जैसे दिमाग में आइडिया आया और वह पार्ट्स जोड़ता गया।
बाबूलाल ने बताया कि पढ़ाई छोड़ने के बाद खेती के साथ-साथ ऐसी मशीनरी के कुछ पार्ट्स जोड़कर हल में सुधार किया। इसके बाद मशीनों से जुगाड़ कर हाल ही में खेत में बुवाई की मशीन बनाई। जिसे देखने मे ऐसा लगता है जैसे किसी इंजीनियर ने इसे बनाया हो। इस मशीन को बनाने से पहले एक लकड़ी के पटिये पर इंजन लगाकर परीक्षण किया।
परीक्षण सफल होने के बाद मशीन बनाने के लिए करीब एक माह का समय लगा। बाबूलाल ने सबसे पहले एक पुस्तक में सभी पार्ट्स को अरेंज करने के लिए नक्शा बनाया। इसके बाद जैसे-जैसे दिमाग में आइडिया आया और वह पार्ट्स जोड़ता गया।