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आठ साल पहले गुम हुआ बेटा इस हाल में मिला, कहानी सुनकर आ जाएंगे आंसू
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 03 Nov 2017 02:52 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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इस परिवार में आठ साल बाद खुशी लौट कर आई। आठ साल इस परिवार ने जिस बेटे को खोया था वह ट्रेन में भीख मांगते हुए मिला।
बेटे की मिलने की आस खो चुके इस परिवार में अब त्यौंहार जैसा माहौल हो गया। मामला झुंझनूं जिले के मंड्रेला कस्बे का है। यहां कस्बे में भार्गव परिवार में घर में खुशियां लौट आई। आठ साल पहले लापता हुआ रोहित कल शाम घर आया तो अपने लाल को देख मां की आंखों से आंसू निकल पड़े।
रोहित 26 जून 2009 को लापता हो गया था। उसके एक दिन बाद ही कस्बे के ही पांच साल का गौरव निर्वाण लापता हो गया था। उसके बाद पुलिस और परिजनों ने इन दोनों को खूब तलाश, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हाल में रोहित को हिसार ट्रेन में भीख मांगते हुए उसके चचेरे भाई ने पहचान लिया। पुलिस की मदद से उसे घर लाया गया तो घर में दिवाली का सा माहौल हो गया।
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बेटे की मिलने की आस खो चुके इस परिवार में अब त्यौंहार जैसा माहौल हो गया। मामला झुंझनूं जिले के मंड्रेला कस्बे का है। यहां कस्बे में भार्गव परिवार में घर में खुशियां लौट आई। आठ साल पहले लापता हुआ रोहित कल शाम घर आया तो अपने लाल को देख मां की आंखों से आंसू निकल पड़े।
रोहित 26 जून 2009 को लापता हो गया था। उसके एक दिन बाद ही कस्बे के ही पांच साल का गौरव निर्वाण लापता हो गया था। उसके बाद पुलिस और परिजनों ने इन दोनों को खूब तलाश, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हाल में रोहित को हिसार ट्रेन में भीख मांगते हुए उसके चचेरे भाई ने पहचान लिया। पुलिस की मदद से उसे घर लाया गया तो घर में दिवाली का सा माहौल हो गया।
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child kidnapping
घर पहुंचने के बाद रोहित अभी सामान्य नहीं हो पाया है। वह अपने साथ हुई आपबीती भी पूरी तरह नहीं बता पा रहा है।
रोहित ने बस इतना बताया कि वह पहले दो साल किसी आदमी के घर रहा। उसके बाद पता नहीं वह कैसे उसका उस आदमी से साथ छूटा। इसके बाद वह पांच साल रेलवे स्टेशनों पर रहा और ट्रेनों में धक्के खाता रहा। कभी भीख मांग कर तो कभी लंगरों में खाना खाकर पेट भरता। उसकी आपबीती सुनकर परिजनों की आंखें भर आई।
26 जून 2009 को मंड्रेला कस्बे में पुलिस चौकी के पास रहने वाले महेंद्र भार्गव का पांच साल का बेटा रोहित घर के पास से गायब हो गया था। उसके अगले दिन सुधीर निर्वाण का पांच साल का बेटा लापता हो गया। एक साथ दो बच्चों के गुम होने से गांव में भय का माहौल ओर पुलिस में हड़कंप की स्थिति हो गई थी। बच्चों के लापता होने से कस्बेवासियों में आक्रोश पनप गया और लोग आन्दोलन पर उतर आए।
रोहित ने बस इतना बताया कि वह पहले दो साल किसी आदमी के घर रहा। उसके बाद पता नहीं वह कैसे उसका उस आदमी से साथ छूटा। इसके बाद वह पांच साल रेलवे स्टेशनों पर रहा और ट्रेनों में धक्के खाता रहा। कभी भीख मांग कर तो कभी लंगरों में खाना खाकर पेट भरता। उसकी आपबीती सुनकर परिजनों की आंखें भर आई।
26 जून 2009 को मंड्रेला कस्बे में पुलिस चौकी के पास रहने वाले महेंद्र भार्गव का पांच साल का बेटा रोहित घर के पास से गायब हो गया था। उसके अगले दिन सुधीर निर्वाण का पांच साल का बेटा लापता हो गया। एक साथ दो बच्चों के गुम होने से गांव में भय का माहौल ओर पुलिस में हड़कंप की स्थिति हो गई थी। बच्चों के लापता होने से कस्बेवासियों में आक्रोश पनप गया और लोग आन्दोलन पर उतर आए।