{"_id":"59a92e9b4f1c1bfc268b4c62","slug":"expert-team-to-find-saraswati-river","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एक नदी खो गई है, तलाश करने के लिए भटक रही है एक्सपर्ट की टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक नदी खो गई है, तलाश करने के लिए भटक रही है एक्सपर्ट की टीम
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 01 Sep 2017 03:33 PM IST
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एक नदी जो कभी कल कल करके बहती थी अब लुप्त हो गई है, इस नदी की तलाश जोर शोर से की जा रही है। इसके लिए एक्सपर्ट की टीम ने राजस्थान का दौरा भी किया।
सरस्वती नदी की पुनः खोज के लिए केंद्र सरकार के अंतरगर्त अध्ययन दल ने जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया। जैसलमेर हरियाणा सरस्वती हैरिटेज डवलपमेंट बोर्ड की टीम और राजस्थान सरकार के भूजल टीम ने जैसलमेर जिले के सीमावर्ती गांवों में सरस्वती नदी की विजिबिलिटी सहित अन्य संभावनाएं तलाशी।
हरियाणा बोर्ड के डिप्टी प्रसिडेंट प्रशांत भारद्वाज के नेतृत्व में टीम ने सीमावर्ती रणाऊ, तनोट, किशनगढ़, कुरिया बेरी व धरमी कुआ क्षेत्र में सर्वे कर डाटा कलेक्शन किया। टीम ने यहां सरस्वती नदी की विजिबिलिटी भी जांची। अब इस टीम द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की जाकर हरियाणा सरकार को सौंपी जाएगी।
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सरस्वती नदी की पुनः खोज के लिए केंद्र सरकार के अंतरगर्त अध्ययन दल ने जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया। जैसलमेर हरियाणा सरस्वती हैरिटेज डवलपमेंट बोर्ड की टीम और राजस्थान सरकार के भूजल टीम ने जैसलमेर जिले के सीमावर्ती गांवों में सरस्वती नदी की विजिबिलिटी सहित अन्य संभावनाएं तलाशी।
हरियाणा बोर्ड के डिप्टी प्रसिडेंट प्रशांत भारद्वाज के नेतृत्व में टीम ने सीमावर्ती रणाऊ, तनोट, किशनगढ़, कुरिया बेरी व धरमी कुआ क्षेत्र में सर्वे कर डाटा कलेक्शन किया। टीम ने यहां सरस्वती नदी की विजिबिलिटी भी जांची। अब इस टीम द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की जाकर हरियाणा सरकार को सौंपी जाएगी।
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यूं कर रहे हैं तलाश
जैसलमेर में एक्सपर्ट
- फोटो : अमर उजाला
इस टीम में भूजल विभाग राजस्थान सरकार के मुख्य अभियंता सूरजभानसिंह, हरियाणा सिंचाई विभाग के एसई अरविंद कोशिक, तकनीकी कंसलटेंट आदित्य व जैसलमेर के वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक एन.डी इणखिया भी शामिल थे।
प्रशांत भारद्वाज ने बताया कि हरियाणा सरकार ने 2014 में यह प्रोजेक्ट शुरू किया था। 21 अप्रैल 2015 को हमने सारे रिकॉर्ड व डाटा कलेक्शन कर सरस्वती नदी की खोज शुरू कर दी। हमारे पास इसरो, ओएनजीसी, राजस्थान व हरियाणा के भूजल विभाग के साथ जियोलॉजिकल स्टडी और वैज्ञानिक सबूत भी है।
उन्होंने बताया कि यह नदी हरियाणा के साथ साथ राजस्थान व गुजरात भी में बहती थी। ऐसे में अब यहां की सरकारों को भी इस प्रोजेक्ट में साथ जुड़ने की जरूरत है। केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने भी यही कहा था। भारद्वाज ने बताया कि यह बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है और हमारी संस्कृति, सभ्यता व धरोहर से जुड़ा हुआ है।
वर्तमान में हमारे पास 5 हजार से 18 से 20 हजार साल पुराने फॉसिल्स उपलब्ध है। यह प्रोजेक्ट का भविष्य जल प्रबंधन व हेरिटेज टूरिज्म के तौर पर देखा जा सकता है।
प्रशांत भारद्वाज ने बताया कि हरियाणा सरकार ने 2014 में यह प्रोजेक्ट शुरू किया था। 21 अप्रैल 2015 को हमने सारे रिकॉर्ड व डाटा कलेक्शन कर सरस्वती नदी की खोज शुरू कर दी। हमारे पास इसरो, ओएनजीसी, राजस्थान व हरियाणा के भूजल विभाग के साथ जियोलॉजिकल स्टडी और वैज्ञानिक सबूत भी है।
उन्होंने बताया कि यह नदी हरियाणा के साथ साथ राजस्थान व गुजरात भी में बहती थी। ऐसे में अब यहां की सरकारों को भी इस प्रोजेक्ट में साथ जुड़ने की जरूरत है। केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने भी यही कहा था। भारद्वाज ने बताया कि यह बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है और हमारी संस्कृति, सभ्यता व धरोहर से जुड़ा हुआ है।
वर्तमान में हमारे पास 5 हजार से 18 से 20 हजार साल पुराने फॉसिल्स उपलब्ध है। यह प्रोजेक्ट का भविष्य जल प्रबंधन व हेरिटेज टूरिज्म के तौर पर देखा जा सकता है।