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एफआईआर पर कार्रवाई नहीं होने पर डीजीपी तलब
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 15 Nov 2017 07:59 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने झुंझुनूं की टमकोर पंचायत समिति के तत्कालीन सरपंच की ओर से सरकारी भूमि पर पट्टे काटने के मामले में दर्ज एफआईआर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने बृहस्पतिवार को डीजीपी को पेश होकर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश विजयकुमार भंसाली की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी अदालत में पेश हुए। अदालत की ओर से प्रकरण में की गई जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगने पर जांच अधिकारी अदालत को संतुष्ट नहीं कर सके। इस पर अदालत ने कहा कि डीजीपी को ऐसे अफसरों पर कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने डीजीपी को पेश होने के आदेश दिए हैं।
अधिवक्ता हनुमान चौधरी ने बताया कि पंचायत समिति का सरपंच बनने के बाद याचिकाकर्ता की ओर से वर्ष 2010 में मलसीसर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि पूर्व सरपंच गोकुलचंद ने पंचायत का रिकॉर्ड मुहैया नहीं कराया और सरकारी भूमि पर सैकड़ों पट्टे काटकर अपने चहेतों को भूमि बांट दी। एफआईआर पर तत्कालीन जांच अधिकारी ने प्रकरण को सिविल नेचर का बताकर एफआर पेश कर दी। जिसमें अदालत ने अग्रिम जांच के आदेश दिए। वहीं अदालती आदेश के बावजूद रिकॉर्ड मुहैया नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने अवमानना का प्रसंज्ञान लेते हुए जांच अधिकारी को बुधवार को पेश होने के आदेश दिए थे।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश विजयकुमार भंसाली की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी अदालत में पेश हुए। अदालत की ओर से प्रकरण में की गई जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगने पर जांच अधिकारी अदालत को संतुष्ट नहीं कर सके। इस पर अदालत ने कहा कि डीजीपी को ऐसे अफसरों पर कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने डीजीपी को पेश होने के आदेश दिए हैं।
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अधिवक्ता हनुमान चौधरी ने बताया कि पंचायत समिति का सरपंच बनने के बाद याचिकाकर्ता की ओर से वर्ष 2010 में मलसीसर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि पूर्व सरपंच गोकुलचंद ने पंचायत का रिकॉर्ड मुहैया नहीं कराया और सरकारी भूमि पर सैकड़ों पट्टे काटकर अपने चहेतों को भूमि बांट दी। एफआईआर पर तत्कालीन जांच अधिकारी ने प्रकरण को सिविल नेचर का बताकर एफआर पेश कर दी। जिसमें अदालत ने अग्रिम जांच के आदेश दिए। वहीं अदालती आदेश के बावजूद रिकॉर्ड मुहैया नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने अवमानना का प्रसंज्ञान लेते हुए जांच अधिकारी को बुधवार को पेश होने के आदेश दिए थे।
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