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बाड़मेर में प्रस्तावित रिफाइनरी पर से छंटे विवाद के बादल
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 30 Mar 2017 09:00 PM IST
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राजस्थान विधानसभा
- फोटो : file photo
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राजस्थान के बाड़मेर में प्रस्तावित रिफाइनरी पर से विवाद के बादल छंटते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में ऐलान किया कि इस रिफाइनरी के लिए जल्द ही एचपीसीएल के साथ नए प्रस्तावों के अनुरूप एमओयू साइन होगा।
मुख्यमंत्री राजे राजस्थान विनियोग विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने बाड़मेर में रिफाइनरी के लिए बिना सोच-विचार किए एमओयू किया था, जबकि हमारी सरकार ने प्रदेश के हितों के साथ कोई समझौता मंजूर नहीं किया। राजे ने दावा किया कि एचपीसीएल ने अपने पुराने प्रस्ताव बदल को तैयार है। ऐसे में रिफाइनरी की स्थापना से पड़ने वाला वित्तीय भार परियोजना की लागत बढ़ने के बावजूद करीब दो-तिहाई घटकर अब 20 हजार 583 करोड़ रुपए रह गया है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही एचपीसीएल के नये प्रस्ताव के मुताबिक रिफाइनरी के लिए एमओयू होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा एचपीसीएल के साथ किए गए एमओयू के मुताबिक राज्य सरकार को 15 वर्ष तक प्रतिवर्ष ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 3 हजार 736 करोड़ रुपए देने पड़ते, जो रि-नेगोशिएशन से अब मात्र 1 हजार 123 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष ही रह गया है।
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इस तरह 15 वर्षों में ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दी जाने वाली राशि 56 हजार 40 करोड़ रुपए से घटकर 16 हजार 845 करोड़ रुपए ही रह गई है। पिछली सरकार ने रिफाइनरी में 26 प्रतिशत इक्विटी के रूप में 3871 करोड़ देना तय किया था। नये प्रस्ताव में यह राशि भी घटकर 3738 करोड़ रह गई है।
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मुख्यमंत्री राजे राजस्थान विनियोग विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने बाड़मेर में रिफाइनरी के लिए बिना सोच-विचार किए एमओयू किया था, जबकि हमारी सरकार ने प्रदेश के हितों के साथ कोई समझौता मंजूर नहीं किया। राजे ने दावा किया कि एचपीसीएल ने अपने पुराने प्रस्ताव बदल को तैयार है। ऐसे में रिफाइनरी की स्थापना से पड़ने वाला वित्तीय भार परियोजना की लागत बढ़ने के बावजूद करीब दो-तिहाई घटकर अब 20 हजार 583 करोड़ रुपए रह गया है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही एचपीसीएल के नये प्रस्ताव के मुताबिक रिफाइनरी के लिए एमओयू होगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा एचपीसीएल के साथ किए गए एमओयू के मुताबिक राज्य सरकार को 15 वर्ष तक प्रतिवर्ष ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 3 हजार 736 करोड़ रुपए देने पड़ते, जो रि-नेगोशिएशन से अब मात्र 1 हजार 123 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष ही रह गया है।
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इस तरह 15 वर्षों में ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दी जाने वाली राशि 56 हजार 40 करोड़ रुपए से घटकर 16 हजार 845 करोड़ रुपए ही रह गई है। पिछली सरकार ने रिफाइनरी में 26 प्रतिशत इक्विटी के रूप में 3871 करोड़ देना तय किया था। नये प्रस्ताव में यह राशि भी घटकर 3738 करोड़ रह गई है।
विकास पर व्यय देश के औसत से अधिक
राजस्थान विधानसभा
- फोटो : file photo
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विकास एवं आर्थिक क्षेत्र पर व्यय का औसत देश के औसत से करीब 8 फीसदी अधिक है। प्रदेश में सामान्य श्रेणी के राज्यों की तुलना में विकास पर औसत खर्च करीब 10 प्रतिशत अधिक एवं आर्थिक क्षेत्र में खर्च करीब 16 प्रतिशत अधिक है, जो प्रदेश के लिए हमारे कमिटमेंट को दर्शाता है। उन्होंने इसकी तथ्यात्मक जानकारी सदन के पटल पर रखी।
एनएचएआई के माध्यम से शीघ्र पूरी करेंगे रिंग रोड
मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जयपुर शहर की रिंग रोड परियोजना को एनएचएआई के माध्यम से शीघ्र पूर्ण करवाने पर अपनी सहमति दी है। उन्होंने कहा कि अब जमीनी स्तर पर रिंग रोड परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ेगा।
एनएचएआई के माध्यम से शीघ्र पूरी करेंगे रिंग रोड
मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जयपुर शहर की रिंग रोड परियोजना को एनएचएआई के माध्यम से शीघ्र पूर्ण करवाने पर अपनी सहमति दी है। उन्होंने कहा कि अब जमीनी स्तर पर रिंग रोड परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ेगा।