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सिर पर मंडराती रहती है मौत, देखिए शिक्षा की ये तस्वीर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 14 Sep 2017 01:55 PM IST
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जैसलमेर में सरकारी स्कूल की दीवार में दरार
- फोटो : amar ujala
देश में भले ही शिक्षा के अधिकारों की बात की जाती हो, लेकिन हकीकत देखकर दिल सहम जाता है। हालात ये हैं कि बच्चों के सिर पर मौत मंडरा रही है और सुध लेने वाला कोई नहीं है।
ताजा मामला राजस्थान के जैसलमेर का है। यहां के रामगढ की ग्राम पंचायत बांधा मुख्यालय पर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हालत में है। स्कूल में 16 कक्षा कक्ष है, लेकिन उसमें से 13 जर्जर हो चुके हैं। इनमें कई कक्षा कक्ष के छतों की पट्टीयां टूटी हैं तो कुछ की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। ऐसे में यहां हमेशा हादसे का डर मासूम बच्चों पर मंडराता रहता है। स्कूल प्रशासन ने इस संबंध में जिला प्रशासन को लिखित में अवगत कराया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। हादसे से बचने के लिए यहां दो-तीन कक्षाओं को एक साथ बिठाकर शिक्षण कार्य करवाया जाता है।
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ताजा मामला राजस्थान के जैसलमेर का है। यहां के रामगढ की ग्राम पंचायत बांधा मुख्यालय पर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हालत में है। स्कूल में 16 कक्षा कक्ष है, लेकिन उसमें से 13 जर्जर हो चुके हैं। इनमें कई कक्षा कक्ष के छतों की पट्टीयां टूटी हैं तो कुछ की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। ऐसे में यहां हमेशा हादसे का डर मासूम बच्चों पर मंडराता रहता है। स्कूल प्रशासन ने इस संबंध में जिला प्रशासन को लिखित में अवगत कराया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। हादसे से बचने के लिए यहां दो-तीन कक्षाओं को एक साथ बिठाकर शिक्षण कार्य करवाया जाता है।
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दरारों से दिखता है आर-पार
जैसलमेर में सरकारी स्कूल की दीवार में दरार
- फोटो : amar ujala
स्कूल में अधिकतर कक्षाएं बरामदों में चलती हैं तथा कुछ कक्षाएं पेड़ों की छांव में चलती है। धूप से बचने के लिए स्थिति यह है कि जैसे-जैसे पेड़ की छांव सरकती है बच्चे भी सरकते देखें जा सकते हैं। उधर, ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग ध्यान नहीं दे रहा है और जनप्रतिनिधि भी केवल समस्याएं सुनकर आश्वासन देकर चले जाते हैं।
अभिभावकों का कहना है कि बारिश के दौरान कक्षा कक्षों की छत टपकती रहती है वहीं दीवारों में पड़ी दरारों से आर पार दिखता है। आर्थिक तंगी के चलते निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ा नहीं सकते और सरकारी में ये हालात हैं। ऐसे में आखिर बच्चे शिक्षा प्राप्त करने जाए कहां।
अभिभावकों का कहना है कि बारिश के दौरान कक्षा कक्षों की छत टपकती रहती है वहीं दीवारों में पड़ी दरारों से आर पार दिखता है। आर्थिक तंगी के चलते निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ा नहीं सकते और सरकारी में ये हालात हैं। ऐसे में आखिर बच्चे शिक्षा प्राप्त करने जाए कहां।