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एज्युकेशन सिटी से फिर लापता हुआ कोचिंग छात्र, यह है वजह
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 02 Aug 2017 03:14 PM IST
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छात्र शैलेश कुमार
- फोटो : Amar Ujala
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एज्युकेशन सिटी कोटा से छात्रों के लापता होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब एक और कोचिंग छात्र के लापता होने का मामला सामने आया है।
लापता हुए कोचिंग छात्र के पिता दलपत सिंह ने कोटा शहर के महावीर नगर थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज करवाया था। जिसमें बताया कि उनका 15 वर्षीय पुत्र शैलेश कुमार महावीर नगर तृतीय में रह रहा था। वह कोटा में आईआईटी की कोचिंग कर रहा था। चार दिन पहले कोचिंग जाने की बात कहकर घर से निकला था। इसके बाद ना कोचिंग लौटा और नाहीं घर पहुंचा। संपर्क नहीं होने पर परिजनों को चिंता हुई तब उसे तलाश किया।
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लापता हुए कोचिंग छात्र के पिता दलपत सिंह ने कोटा शहर के महावीर नगर थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज करवाया था। जिसमें बताया कि उनका 15 वर्षीय पुत्र शैलेश कुमार महावीर नगर तृतीय में रह रहा था। वह कोटा में आईआईटी की कोचिंग कर रहा था। चार दिन पहले कोचिंग जाने की बात कहकर घर से निकला था। इसके बाद ना कोचिंग लौटा और नाहीं घर पहुंचा। संपर्क नहीं होने पर परिजनों को चिंता हुई तब उसे तलाश किया।
पांच दिन पहले भी लापता हुआ है एक छात्र
missing man
गौरतलब है कि कोटा में छात्रों के लापता होने या फिर सुसाइड के मामले आए दिन सामने आते रहते है। पांच दिन पहले भी यहां से एक छात्र लापता हुआ था। उसका भी अभी तक कोई पता नहीं चला।
उधर, पुलिस का कहना है कि लापता होने पर परिजनों की ओर रिपोर्ट करवाई जाती है लेकिन छात्र वापस मिला या नहीं इसकी जानकारी पुलिस के पास नहीं होती। छात्र के मिलने के बाद परिजन नहीं चाहते कि वह कानूनी प्रक्रिया में पड़े। दूसरी ओर यह भी है कई छात्रों का अब तक पता नहीं चला है।
दरसअल स्टूडेंट प्रतिस्पर्धा के चलते तनाव में आ जाते है। इसके साथ की कई बार पढ़ाई में कमजोर होने और परिजनों से दूर रहने के कारण भी वे भाग जाने या फिर सुसाइड जैसा कदम उठा लेते है। यहां आत्महत्याएं रोकने को लेकर भी कई योजनाएं बनाई जा चुकी है।
उधर, पुलिस का कहना है कि लापता होने पर परिजनों की ओर रिपोर्ट करवाई जाती है लेकिन छात्र वापस मिला या नहीं इसकी जानकारी पुलिस के पास नहीं होती। छात्र के मिलने के बाद परिजन नहीं चाहते कि वह कानूनी प्रक्रिया में पड़े। दूसरी ओर यह भी है कई छात्रों का अब तक पता नहीं चला है।
दरसअल स्टूडेंट प्रतिस्पर्धा के चलते तनाव में आ जाते है। इसके साथ की कई बार पढ़ाई में कमजोर होने और परिजनों से दूर रहने के कारण भी वे भाग जाने या फिर सुसाइड जैसा कदम उठा लेते है। यहां आत्महत्याएं रोकने को लेकर भी कई योजनाएं बनाई जा चुकी है।