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गोपालगढ़ दंगा मामले में हाइकोर्ट ने मुख्य आरोपी को जमानत देने से किया इनकार
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 03 Apr 2017 07:03 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : Internet
बहुचर्चित गोपालगढ़ दंगा मामले में राजस्थान हाइकोर्ट ने मुख्य आरोपी को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दंगा भड़काने में लिप्त मुख्य आरोपी अब्दुल गनी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया है।
याचिका में कहा गया था कि आरोपी अब्दुल गनी पिछले 5 साल से जेल में बंद है और मामले में पूरा फैसला आने में अभी समय लगेगा ऐसे में आरोपी को जमानत पर रिहा किए जाने की अपील की गई थी जिसे न्यायाधीश सबीना ने ठुकरा दिया।
इससे पहले मामले की जांच में जुटी सीबीआई ने आरोपी की जमानत याचिका पर विरोध दर्ज कराते हुए कोर्ट से कहा था कि अब्दुल गनी गोपालगढ़ कांड का मुख्य आरोपी है जिसपर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए भड़काउ भाषण दिए थे।
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वहीं सीबीआई ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपी के घर से गोलियां भी चलाई गई थी और उसपर हत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज है। सीबीआई ने कोर्ट से अपील की कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो पूरी जांच को प्रभावित किया जा सकता है।
अंत में दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। फिलहाल इस पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 170 गवाह पेश किए गए जिनमें से केवल 8 गवाहों के बयानों को दर्ज किया गया है।
गौरतलब है 14 सितंबर 2011 को भरतपुर के गोपालगढ़ कस्बे में सांप्रदायिक दंगे हुए थे जिसमें करीब 10 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में सीबीआई ने तत्कालीन एमएलए जाहिदा खान और अनीता सिंह सहित 64 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज किया था और इन सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र भी पेश हो चुका है।
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याचिका में कहा गया था कि आरोपी अब्दुल गनी पिछले 5 साल से जेल में बंद है और मामले में पूरा फैसला आने में अभी समय लगेगा ऐसे में आरोपी को जमानत पर रिहा किए जाने की अपील की गई थी जिसे न्यायाधीश सबीना ने ठुकरा दिया।
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इससे पहले मामले की जांच में जुटी सीबीआई ने आरोपी की जमानत याचिका पर विरोध दर्ज कराते हुए कोर्ट से कहा था कि अब्दुल गनी गोपालगढ़ कांड का मुख्य आरोपी है जिसपर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए भड़काउ भाषण दिए थे।
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वहीं सीबीआई ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपी के घर से गोलियां भी चलाई गई थी और उसपर हत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज है। सीबीआई ने कोर्ट से अपील की कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो पूरी जांच को प्रभावित किया जा सकता है।
अंत में दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। फिलहाल इस पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 170 गवाह पेश किए गए जिनमें से केवल 8 गवाहों के बयानों को दर्ज किया गया है।
गौरतलब है 14 सितंबर 2011 को भरतपुर के गोपालगढ़ कस्बे में सांप्रदायिक दंगे हुए थे जिसमें करीब 10 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में सीबीआई ने तत्कालीन एमएलए जाहिदा खान और अनीता सिंह सहित 64 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज किया था और इन सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र भी पेश हो चुका है।