पुलिस की गिरफ्त में आया 'मुर्दा', पत्नी के साथ इसलिए चल रहा था फरार
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पुलिस ने आज एक 'मुर्दा' व्यक्ति को उसकी पत्नी के साथ गिरफ्तार कर लिया है।
मामला फर्जी मौत दिखाकर इंश्योरेंस डेथ क्लेम उठाने वाली गैंग से जुड़ा हुआ है। इस गैंग का पर्दाफाश राजस्थान एसओजी ने नौ फरवरी को छह आरोपियों को अरेस्ट किया था। इस मामले में फरार चल रहे एक दंपती को आज गिरफ्तार कर लिया।
डीआईजी संजय श्रोत्रिय ने बताया कि एसओजी पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपी जितेंद्र सिंह और उसकी पत्नी मंजू है। आरोपी जितेंद्र सिंह आॅटोरिक्शा चालक है और दिल्ली का रहने वाला है। एसओजी ने आरोपी दंपत्ति को उत्तरप्रदेश से पकड़ा। इसके बाद उन्हें आज जयपुर लेकर पहुंची।
एसओजी एडीजी उमेश मिश्रा ने बताया कि इससे पहले 9 फरवरी को इस संगठित गैंग में शामिल छह आरोपियों को एसओजी गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें रघुराज चौहान, राजेश कुमार निवासी पालम विहार, गुरुग्राम हाल मैनेजर यूनियन बैंक आॅफ इंडिया है।
एक आदमी का छह कंपनियों से इंश्योरेंस
तीसरा आरोपी एडवोकेट चतुर्भुज मीणा निवासी दौसा है। आरोपी यशवंत सिंह उर्फ यश चौहान निवासी उत्तरप्रदेश हाल नई दिल्ली है। पांचवां आरोपी रमेशचंद्र जाटव निवासी हिंडौन सिटी, करौली हाल एएसआई थाना रामगढ़ पचवारा जिला दौसा है। जबकि आरोपी डॉक्टर सतीश कुमार खंडेलवाल निवासी दौसा है। वह सरकारी अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी है।
इस गैंग का मुख्य सूत्रधार इंश्योरेंस कंपनी का क्लेम उठाने से पहले फील्ड इंवेस्टिगेशन करवाने वाली एक फर्म का संचालक रघुराज सिंह चौहान है। चौहान ने इंश्योरेंस डेथ क्लेम फर्जीवाड़े से पाने के लिए आरोपी आॅटोरिक्शा चालक जितेंद्र का पहले छह कंपनियों से इंश्योरेंस करवाया। इसके बाद फर्जी सड़क हादसे में जितेंद्र की मौत होना बता दिया।
यूं हुआ पर्दाफाश
रघुराज चौहान ने प्रोफेशनल गैंग में शामिल जितेंद्र की मौत की सड़क हादसे में फर्जी मुकदमा दर्ज करवाया। डॉक्टर सतीश से फर्जी तरीके से मौके पर पोस्टमार्टम होना बताया। इसके बजाज इंश्योरेंस कंपनी से 16 लाख रुपयों का डेथ क्लेम उठाकर इंश्योरेंस पॉलिसी में नॉमिनी बनी उसकी पत्नी मंजू को दिलवा दिए।
फिर इन रुपयों का आपस में बंटवारा कर लिया। पिछले साल 10 अक्टूबर को दौसा जिले के कोतवाली थाने में पुलिस की एक झूठी तहरीर द्वारा जितेंद्र सिंह नामक व्यक्ति का फर्जी पोस्टमार्टम करवाने का मुकदमा दर्ज हुआ था। तब केस की जांच एएसपी करन शर्मा को सौंपी गई तो अनुसंधान में गैंग का पर्दाफाश हुआ।