गौ रक्षा की बड़ी—बड़ी बातें करनी वाली भाजपा की सरकार होने के बावजूद राजस्थान की राजधानी जयपुर में सरकार की नाक के नीचे गाय की दुर्गति हो रही है। गंभीर बात ये भी है कि नगर निगम का बोर्ड भी भाजपा का ही है। फिर भी गायों की जीते जी ही नहीं मरने के बाद स्थिति बदहाल है। राजस्थान पहला राज्य है, जहां गौपालन विभाग बनाकर इसका जिम्मा राज्य मंत्री को सौंपा गया है। राजस्थान सरकार गायों के नाम पर जनता से सेस भी वसूल रही है।
मरने के बाद पूरी मिट्टी भी नसीब नहीं
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हिंगोनिया गौशाला
- फोटो : अमर उजाला
जयपुर में नगर निगम की ओर संचालित हिंगोनिया गौशाला को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट कई बार राज्य सरकार, जयपुर नगर निगम, पशुपालन विभाग को लताड़ लगा चुका हैं। सरकार करोड़ों का बजट भी यहां खर्च कर रही है। यहां पर पशु अस्पताल तथा दूसरी कई सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहे है। लेकिन यहां गौमाता के अंतिम क्रिया कर्म की तस्वीरें देखेंगे तो आप दहल जाएंगे।
जीते जी भी गाय की दुर्गति
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हिंगोनिया गौशाला
- फोटो : अमर उजाला
हिंगोनिया गौशाला में आमतौर पर बीमार गायों को लाया जाता है। लेकिन यहां ये पशु चिकित्सक को तरस्ती रहती हैं और धीरे-धीरे दम तोड़ देती हैं। हर दिन यहां 50-60 गायें रोजाना मर जाती है। यहां पर पालतू गौवंश भी लाया जाता है। जिन्हें तो लोग पैसे ले—देकर छुड़ा ले जाते हैं। लावारिस को यहां अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है।
कुत्ते इन गायों को बाहर निकाल लेते हैं
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हिंगोनिया गौशाला
- फोटो : अमर उजाला
हिंगोनिया गौशाला में मृत गायों को जमीन में दबाने का प्रावधान है। इन्हें यहां आसपास ही दबाया जाता है। इन्हे दबाने में लापरवाही इस कदर बरती जाती है कि कई बार तो कुत्ते इन गायों को बाहर निकाल लेते हैं। गौशाला में जहां गायों को दबाया जाता है, वहां कई लाशें ऐसी मिल जाएगी, जहां इनके अस्थि पंजर आधे जमीन में तो आधे बाहर नजर आ रहे हैं। जबकि यहां लाखों रुपए की मिट्टी भी डलवाई जाती है।
मॉनिटरिंग के वादे निकले झूठे
हिंगोनिया गौशाला में मॉनिटरिंग के भी दावे खूब किए जाते है। नगर निगम और सरकार के स्तर पर समितियां बनी हुई हैं। गौभक्त होने का दावा करने वाले भी यहां खूब आते हैं। इसके बावजूद यहां ये यहां गौ माता की मिट्टी हो रही है।