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कोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान, मासूम बालिका का विवाह रुकवाया 

Fri, 28 Apr 2017 06:35 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर  Updated Fri, 28 Apr 2017 06:35 PM IST
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Court stays child's child marriage in bhilwara
डेमो इमेज - फोटो : Demo pic
राजस्थान में आखातीज पर होने वाले बाल विवाह को रुकवाने के लिए न्यायपालिका भी अहम भूमिका निभा रही है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है भीलवाड़ा की मांडलगढ़ तहसील में। जहां अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बाल विवाह को रोकने के लिए एक परिवाद पर सुनवाई करते हुए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया और 15 वर्षीय बच्ची के पिता को पाबंद करते हुए आदेश दिया कि उसकी बेटी जब तक बालिग नहीं हो जाए तब उसकी शादी नहीं करे।
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जानकारी के अनुसार स्थानीय व्यक्ति लादूराम अपने वकील के साथ एक परिवाद प्रस्तुत करने के लिए मांडलगढ़ एसीजेएम कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुआ था। परिवाद के कथन और पिता व बेटी के कथनों से जाहिर हो रहा था कि बच्ची नाबालिग है और उसके पिता जबरन उसका बाल विवाह करवाना चाह रहे है। बच्ची ने भी कोर्ट के समक्ष बयानों में कहा कि उसके पिता जबरन बाल विवाह करने पर उतारु है। 
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इन तथ्यों को देखते हुए पीठासीन अधिकारी ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत प्रसंज्ञान लिया और बच्ची के पिता को नोटिस देते  बच्ची के पिता को पाबंद करते हुए एक शपथ पत्र लिया और आदेश दिया कि वह बच्ची को बालिग होने तक शादी नहीं करेगा।
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पीठासीन अधिकारी पवन जीनवाल ने अपने आदेश में कहा कि बालविवाह जैसी कुरुति से आज सम्पूर्ण भारतवर्ष लड़ रहा है। उसके उन्मूलन के प्रयास भी जारी है। अत: कोर्ट ने भी प्रसंज्ञान लेते हुए बच्ची के बाल विवाह को रुकवा दिया।
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