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गाय अॉक्सीजन छोड़ती है, बोलनेवाले शिक्षा मंत्री 'प्रोफेसर' क्यों लगाते हैं...
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 07 Apr 2017 04:39 PM IST
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घर के बाहर भी नाम के आगे प्रोफेसर लिखा हुआ
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गाय आॅक्सीजन छोड़ती है और अजमेर में अकबर किले का नाम बदलने को लेकर विवादों में रह चुके राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी अब नए विवाद में घिर गए हैं। ताजा विवाद उनके नाम के आगे प्रोफेसर पद लगाने को लेकर उपजा है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने पूछा है कि राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी अपने नाम के आगे प्रोफेसर क्यों लगाते हैं? अदालत ने इस मामले में वासुदेव देवानानी के साथ—साथ राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को भी नोटिस देकर जवाब तलब किया है। सरकार को इस मामले में चार सप्ताह में जवाब देना हैं। न्यायाधीश मनीष भंडारी की खंडपीठ ने अजमेर निवासी लोकेश शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये देवनानी और मुख्य सचिव को नोटिस जारी किए हैं।
याचिका में बताया गया है कि प्रोफेसर शब्द का उपयोग केवल प्रोफेसर पद पर आसीन व्यक्ति ही कर सकता है। जबकि राज्य के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी के पास न तो प्रोफेसर पद की योग्यता है और न ही वे कभी प्रोफेसर रहे हैं।
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सरकारी पोर्टल पर भी उन्हें प्रोफेसर ही दिखा रखा है जबकि देवनानी केवल स्नातक पास हैं। इन्होंने बीई पास किया है वह भी इलेक्ट्रीकल ब्रांच से। देवनानी ने अपने सरकारी निवास के बाहर भी नेमप्लेट पर नाम के आगे प्रोफेसर लगा रखा है।
आॅफशियल ईमेल और फेसबुक अकाउंट में भी उनके नाम के आगे प्रोफेसर है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने इस सम्बंध में सरकार और लोकायुक्त को भी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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राजस्थान हाईकोर्ट ने पूछा है कि राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी अपने नाम के आगे प्रोफेसर क्यों लगाते हैं? अदालत ने इस मामले में वासुदेव देवानानी के साथ—साथ राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को भी नोटिस देकर जवाब तलब किया है। सरकार को इस मामले में चार सप्ताह में जवाब देना हैं। न्यायाधीश मनीष भंडारी की खंडपीठ ने अजमेर निवासी लोकेश शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये देवनानी और मुख्य सचिव को नोटिस जारी किए हैं।
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याचिका में बताया गया है कि प्रोफेसर शब्द का उपयोग केवल प्रोफेसर पद पर आसीन व्यक्ति ही कर सकता है। जबकि राज्य के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी के पास न तो प्रोफेसर पद की योग्यता है और न ही वे कभी प्रोफेसर रहे हैं।
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सरकारी पोर्टल पर भी उन्हें प्रोफेसर ही दिखा रखा है जबकि देवनानी केवल स्नातक पास हैं। इन्होंने बीई पास किया है वह भी इलेक्ट्रीकल ब्रांच से। देवनानी ने अपने सरकारी निवास के बाहर भी नेमप्लेट पर नाम के आगे प्रोफेसर लगा रखा है।
आॅफशियल ईमेल और फेसबुक अकाउंट में भी उनके नाम के आगे प्रोफेसर है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने इस सम्बंध में सरकार और लोकायुक्त को भी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।