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अधिक अंक के बावजूद सामान्य वर्ग में क्यों नहीं किया शामिल-हाईकोर्ट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 07 Aug 2017 05:51 PM IST
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मेडिकल शिक्षा सचिव और आरपीएससी सचिव तथा अन्य को नोटिस जारी कर हाईकोर्ट ने पूछा है कि अधिक अंक लाने के बावजूद आरक्षित वर्ग के दो अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में शामिल क्यों नहीं किया गया?
न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश ब्रजमोहन मीणा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने मेडिकल शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए 16 जुलाई 2015 को भर्ती विज्ञापन जारी किया। आरपीएससी की ओर से जारी अंतिम चयन सूची में एसटी वर्ग के दो अभ्यर्थियों ने सामान्य वर्ग से अधिक अंक प्राप्त किए, लेकिन उन्हें एसटी वर्ग में ही रखा गया। याचिका में कहा गया कि सामान्य से अधिक अंक लाने पर अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग के पदों के विरूद्ध चयनित किया जाता है। यदि इन दोनों एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन भी सामान्य पदों पर होता तो याचिकाकर्ता एसटी वर्ग की मेरिट लिस्ट में शामिल हो जाते।
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए नियुक्तियों को याचिका के निर्णयाधीन रखा है।
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न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश ब्रजमोहन मीणा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने मेडिकल शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए 16 जुलाई 2015 को भर्ती विज्ञापन जारी किया। आरपीएससी की ओर से जारी अंतिम चयन सूची में एसटी वर्ग के दो अभ्यर्थियों ने सामान्य वर्ग से अधिक अंक प्राप्त किए, लेकिन उन्हें एसटी वर्ग में ही रखा गया। याचिका में कहा गया कि सामान्य से अधिक अंक लाने पर अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग के पदों के विरूद्ध चयनित किया जाता है। यदि इन दोनों एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन भी सामान्य पदों पर होता तो याचिकाकर्ता एसटी वर्ग की मेरिट लिस्ट में शामिल हो जाते।
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जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए नियुक्तियों को याचिका के निर्णयाधीन रखा है।