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माल उतारकर डम्पर में बैठे मजदूरों को नहीं मान सकते यात्री-हाईकोर्ट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 22 Jul 2017 06:25 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावे को लेकर पेश याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पत्थर से भरा डम्पर खाली करने के बाद उसमें मजूदर बैठकर आते हैं तो यह नहीं माना जा सकता कि डम्पर में वे यात्री के तौर पर बैठे थे।
इसके साथ ही अदालत ने दुर्घटना अधिकरण के आदेश को रद्द करते हुए बीमा राशि के भुगतान की जिम्मेदारी बीमा कपंनी पर तय की है। अदालत ने कहा कि यदि वाहन मालिक याचिकाकर्ता से क्षतिपूर्ति की राशि ली गई है तो वह उसे वापस प्राप्त करने का अधिकारी है।
न्यायाधीश महेन्द्र माहेश्वरी की एकलपीठ ने यह आदेश नाहीद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता मोहित बलवदा ने अदालत को बताया कि 19 मार्च 2004 को कोटा में याचिकाकर्ता के डम्पर में बैठे मजूदर की नीचे उतरने के दौरान मौत हो गई थी। जिसकी क्षतिपूर्ति निर्धारण के दौरान मोटर दुर्घटना अधिकरण ने यह कहते हुए बीमा कंपनी को दायित्व से मुक्त कर दिया था कि माल वाहन को यात्री परिवहन के लिए काम में लिया जा रहा था।
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याचिका में कहा गया कि मृतक डम्पर पर ही मजदूरी करता था। घटना के दिन डम्पर से पत्थर खाली करने के बाद मजदूरों को वापस लाया जा रहा था। ऐसे में मजदूरों को यात्री नहीं माना जा सकता।जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने मजदूरों का यात्री मानने से इंकार करते हुए क्षतिपूर्ति राशि के लिए बीमा कंपनी का ही उत्तरदायित्व माना है।
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इसके साथ ही अदालत ने दुर्घटना अधिकरण के आदेश को रद्द करते हुए बीमा राशि के भुगतान की जिम्मेदारी बीमा कपंनी पर तय की है। अदालत ने कहा कि यदि वाहन मालिक याचिकाकर्ता से क्षतिपूर्ति की राशि ली गई है तो वह उसे वापस प्राप्त करने का अधिकारी है।
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न्यायाधीश महेन्द्र माहेश्वरी की एकलपीठ ने यह आदेश नाहीद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता मोहित बलवदा ने अदालत को बताया कि 19 मार्च 2004 को कोटा में याचिकाकर्ता के डम्पर में बैठे मजूदर की नीचे उतरने के दौरान मौत हो गई थी। जिसकी क्षतिपूर्ति निर्धारण के दौरान मोटर दुर्घटना अधिकरण ने यह कहते हुए बीमा कंपनी को दायित्व से मुक्त कर दिया था कि माल वाहन को यात्री परिवहन के लिए काम में लिया जा रहा था।
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याचिका में कहा गया कि मृतक डम्पर पर ही मजदूरी करता था। घटना के दिन डम्पर से पत्थर खाली करने के बाद मजदूरों को वापस लाया जा रहा था। ऐसे में मजदूरों को यात्री नहीं माना जा सकता।जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने मजदूरों का यात्री मानने से इंकार करते हुए क्षतिपूर्ति राशि के लिए बीमा कंपनी का ही उत्तरदायित्व माना है।