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विवादित बिल: आपस में भिड़े सरकार के मंत्री-विधायक, तीखी बहसबाजी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 24 Oct 2017 01:46 PM IST
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गुलाबचंद कटारिया।
जनप्रतिनिधियों और लोकसेवकों को बचाने के लिए राजस्थान विधानसभा में लाया गया बिल सरकार की गले की फांस बन गया है। विपक्षियों के साथ सरकार के अपने ही विधायकों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
राजस्थान विधानसभा की मंगलवार को कार्यवाही प्रारंभ होने के कुछ समय बाद विवादित 'दंड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश-2017' को वापस लेने की मांग पर भाजपा के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी अपनी ही सरकार के वरिष्ठ मंत्री गुलाबचंद कटारिया से भिड़ गए। दोनों में जमकर बहस हुई। वहीं कांग्रेस के सदस्यों ने भी विवादित बिल को लेकर जमकर हंगामा किया और वैल में उतर आए।
हालांकि हंगामे के बीच गुलाब चंद कटारिया ने इस बिल को प्रवर समिति को सौंपने का प्रस्ताव रखा। सदन ने ध्वनिमत से इस बिल को प्रवर समिति में भेजने के प्रस्ताव को सहमति दी। हंगामे के दौरान ही विधानसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव मंजूर कर बिल को प्रवर समिति में भेजने की स्वीकृति दी।
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राजस्थान विधानसभा की मंगलवार को कार्यवाही प्रारंभ होने के कुछ समय बाद विवादित 'दंड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश-2017' को वापस लेने की मांग पर भाजपा के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी अपनी ही सरकार के वरिष्ठ मंत्री गुलाबचंद कटारिया से भिड़ गए। दोनों में जमकर बहस हुई। वहीं कांग्रेस के सदस्यों ने भी विवादित बिल को लेकर जमकर हंगामा किया और वैल में उतर आए।
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हालांकि हंगामे के बीच गुलाब चंद कटारिया ने इस बिल को प्रवर समिति को सौंपने का प्रस्ताव रखा। सदन ने ध्वनिमत से इस बिल को प्रवर समिति में भेजने के प्रस्ताव को सहमति दी। हंगामे के दौरान ही विधानसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव मंजूर कर बिल को प्रवर समिति में भेजने की स्वीकृति दी।
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प्रवर समिति को नहीं, वापस लो बिल
घनश्याम तिवाड़ी
- फोटो : file photo
शोर-शराबे के बीच घनश्याम तिवाड़ी ने सदन में इस बिल को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस बिल को प्रवर समिति में भेजने के बजाय तुरंत वापस ले लिया जाए। सदन की पूरी कार्यवाही के दौरान तिवाड़ी ने कांग्रेस के विरोध के साथ अपना विरोध भी दर्ज करवाया।
हालांकि कटारिया ने तिवाड़ी की इस बात को न मानकर बिल को वापस लेने के बजाय प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। वहीं बिल को प्रवर समिति के पास भेजा जाना सरकार की रणनीतिक हार के तौर पर देखा जा रहा है। राजे सरकार के बैकफुट पर आने के बाद विपक्षी कांग्रेस ने इसका श्रेय लेना प्रारंभ कर दिया है।
हालांकि कटारिया ने तिवाड़ी की इस बात को न मानकर बिल को वापस लेने के बजाय प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। वहीं बिल को प्रवर समिति के पास भेजा जाना सरकार की रणनीतिक हार के तौर पर देखा जा रहा है। राजे सरकार के बैकफुट पर आने के बाद विपक्षी कांग्रेस ने इसका श्रेय लेना प्रारंभ कर दिया है।