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कांग्रेस में बगावत: विधायकों ने अपनी ही सरकार पर लगाया आवाज दबाने का आरोप

Fri, 12 Mar 2021 08:53 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, जयपुर
पीटीआई, जयपुर Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 12 Mar 2021 08:53 PM IST
सार

राजस्थान की अशोक गलहोत सरकार के खिलाफ पिछले साल बगावती रुख अख्तियार करने वाले सचिन पायलट का साथ देने वाले विधायकों में शामिल कांग्रेस के तीन विधानसभा सदस्यों ने शुक्रवार को फिर बगावती तेवर दिखाए। इन्होंने सदन में अनुसूचित जाति/जनजाति तथा अल्पसंख्यक समुदाय के विधायकों के साथ भेदभाव करने और उनकी आवाज दबाने के प्रयास का आरोप लगाया। इसके साथ ही उनमें से एक ने इस्तीफे की भी धमकी दे दी।

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Congress MLAs blamed government of discrimination with MLAs of SC and SC caste
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत - फोटो : twitter.com/ashokgehlot51

विस्तार

विधायकों ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति समुदाय के विधायकों की न तो सरकार में सुनवाई हो रही है न संगठन में। वे इस बात को पार्टी आलाकमान तक ले जाएंगे। जो विधायक इस मामले को लेकर सामने आए हैं उनमें पूर्व मंत्री रमेश मीणा, विधायक मुरारी लाल मीणा और वेद प्रकाश सोलंकी हैं। इन तीनों ने पिछले साल गहलोत के खिलाफ बागी तेवर अपनाने वाले तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का समर्थन किया था।

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उल्लेखनीय है विधानसभा में 50 विधायकों को बिना माइक वाली सीट दिए जाने का मुद्दा शुक्रवार को और गर्माया। इससे पहले इस मुद्दे पर बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी और कांग्रेस विधायक रमेश मीणा के बीच बहस हुई थी। मीणा ने शुक्रवार को विधानसभा के बाहर कहा, 'मैं अपनी समस्याओं के बारे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलूंगा। मैंने समय मांगा है। अगर वहां भी समस्याएं हल नहीं होती हैं तो मैं इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटूंगा।'
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उल्लेखनीय है कि पिछले साल मुख्यमंत्री गहलोत के खिलाफ बगावत करने के लिए रमेश मीणा को मंत्री पद से हटा दिया गया था। रमेश मीणा ने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत सरकार सदन में अनुसूचित जाति एवं जनुसूचित जनजाति तथा अल्पसंख्यक समुदाय के विधायकों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है क्योंकि उन्होंने बिना माइक वाली सीटें दी गई हैं। उन्होंने कहा कि अब मुख्य सचेतक मामले को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं।
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इस सवाल पर कि क्या वह दोबारा मंत्री बनने के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे, रमेश मीणा ने कहा कि वह पहले भी मंत्री थे और पद पर बने रहने के लिए चुप रह सकते थे। उन्होंने कहा, 'मैं कांग्रेस पार्टी को कमजोर करने वाले कृत्यों के खिलाफ आवाज उठाता रहा हूं और अभी भी उठा रहा हूं। यदि आप हमें बोलने नहीं देते, विकास कार्यों के लिए धन नहीं देते, मंत्री हमसे मिलते नहीं हैं और फिर हमें सरकार की रीढ़ भी कहते हैं, यह कैसे हो सकता है?'

दौसा से कांग्रेस विधायक मुरारी लाल मीणा ने कहा कि शुरुआत से ही भेदभाव किया जा रहा है जिसके लिए सीएम से पार्टी स्तर तक आवाज उठाई गई है। उन्होंने विधानसभा के बाहर कहा, 'मेरे क्षेत्र में विकास कार्य हुए हैं जिन्हें मैं अस्वीकार नहीं कर सकता, लेकिन अनेक निर्वाचन क्षेत्रों में सरकार में कई लोगों के काम नहीं हो रहे हैं।' मीणा ने आरोप लगाया कि कई मंत्री, पदाधिकारी और नेता अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विधायकों की उपेक्षा करते हैं।

उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता अनुसूचित जाति/ जनजाति और अल्पसंख्यकों को कांग्रेस की रीढ़ मानते हैं लेकिन विधानसभा, सरकार और पार्टी स्तर पर ही इस रीढ़ को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'इससे पार्टी को कोई फायदा नहीं होगा और पार्टी को इस पर गौर करना चाहिए।' उधर, चाकसू निर्वाचन क्षेत्र के कांग्रेस पार्टी के विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने आरोप लगाते हुए कि विधानसभा में कुछ चुनिंदा लोगों को ही बोलने की अनुमति रहती है।

सोलंकी ने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए जिन 50 विधायकों को विधानसभा में बिना माइक की सीटें दी गई हैं उनमें से ज्यादातर दलित, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। उन्होंने पार्टी के मुख्य सचेतक महेश जोशी से इन 50 विधायकों की सूची सार्वजनिक करने और विधानसभा में सीट आवंटित करने के मानदंडों की जानकारी देने की मांग की।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक रमेश मीणा ने सवाल पूछना चाहा लेकिन उनकी सीट पर माइक नहीं था। विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने उनसे दूसरी सीट पर जाकर सवाल पूछने को कहा जिससे मीणा ने इनकार कर दिया और कहा कि वह अपनी ही सीट से ही सवाल पूछेंगे। जोशी ने बाद में सदन में इस घटना पर नाराजगी जताई थी।

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