{"_id":"59102a7b4f1c1b3854851875","slug":"collector-s-farewell-party-in-barmer","type":"story","status":"publish","title_hn":"कलक्टर साहब की विदाई पार्टी में भूखे लौटे बाबू, जानिए क्यों","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कलक्टर साहब की विदाई पार्टी में भूखे लौटे बाबू, जानिए क्यों
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 08 May 2017 01:51 PM IST
विज्ञापन
डेमो इमेज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंग्रेजों के जमाने में आपने ऊंच—नीच को भेद आपने पढ़ा होगा, लेकिन आजाद भारत में केवल पद को लेकर ऐसा हो तो ये चौंकाने वाला है। ताजा मामला बाड़मेर जिला कलक्टर की विदाई पार्टी से जुड़ा है जहां बाबू(क्लर्क) बिना खाना खाए ही लौट आए।
दरअसल, बाड़मेर जिला कलक्टर सुधीर कुमार शर्मा का ट्रांसफर होने पर यहां रविवार रात लंगेरा गांव के एक आलीशान रिसोर्ट में पार्टी रखी गई। इसमें जिलेभर के अधिकारी—कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। ऐसे में यहां अधिकारियों के अलावा कलक्ट्रेट में कार्यरत बाबू भी उपस्थित थे। इस दौरान यहां पार्टी में विवाद तब उत्पन्न हो गया जब खाने के वक्त अधिकारियों और बाबुओं में भेदभाव किया गया। भेदभाव के कारण बाबुओं ने अपने आपको अपमानित महसूस किया और भूखे ही घर लौट गए।
नाम नहीं छापने की शर्त पर बाबुओं ने बताया कि पार्टी में खाने के वक्त अधिकारियों के लिए अलग से व्यवस्था की गई और बाबुओं के लिए अलग से। इसके तहत वहां पर उपस्थित जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारियों के लिए खाने की अलग टेबल लगाई गई और बाबुओं की अलग टेबल थी। इस पर वहां उपस्थित बाबुओं ने इस भेदभाव को सहने की बजाय भूखे घर लौटना ही सही समझा।
विज्ञापन
पार्टी में बिना खाना खाए लौटे एक बाबू ने बताया कि यह भेदभाव किस लिए। जब विदाई पार्टी हो रही थी तो वहां अधिकारी और कर्मचारियों की कैटेगरी का भेद क्यों किया गया? या तो हमें निमंत्रण देना ही नहीं था और दिया तो फिर इस तरह का भेदभाव क्यों? हमें नीचा दिखाने के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई। यह हम सहन नहीं कर सके। हमने अपने सम्मान को रखते हुए खाना नहीं खाया और बिना खाए ही पार्टी से लौट गए।
विज्ञापन
दरअसल, बाड़मेर जिला कलक्टर सुधीर कुमार शर्मा का ट्रांसफर होने पर यहां रविवार रात लंगेरा गांव के एक आलीशान रिसोर्ट में पार्टी रखी गई। इसमें जिलेभर के अधिकारी—कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। ऐसे में यहां अधिकारियों के अलावा कलक्ट्रेट में कार्यरत बाबू भी उपस्थित थे। इस दौरान यहां पार्टी में विवाद तब उत्पन्न हो गया जब खाने के वक्त अधिकारियों और बाबुओं में भेदभाव किया गया। भेदभाव के कारण बाबुओं ने अपने आपको अपमानित महसूस किया और भूखे ही घर लौट गए।
विज्ञापन
नाम नहीं छापने की शर्त पर बाबुओं ने बताया कि पार्टी में खाने के वक्त अधिकारियों के लिए अलग से व्यवस्था की गई और बाबुओं के लिए अलग से। इसके तहत वहां पर उपस्थित जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारियों के लिए खाने की अलग टेबल लगाई गई और बाबुओं की अलग टेबल थी। इस पर वहां उपस्थित बाबुओं ने इस भेदभाव को सहने की बजाय भूखे घर लौटना ही सही समझा।
विज्ञापन
पार्टी में बिना खाना खाए लौटे एक बाबू ने बताया कि यह भेदभाव किस लिए। जब विदाई पार्टी हो रही थी तो वहां अधिकारी और कर्मचारियों की कैटेगरी का भेद क्यों किया गया? या तो हमें निमंत्रण देना ही नहीं था और दिया तो फिर इस तरह का भेदभाव क्यों? हमें नीचा दिखाने के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई। यह हम सहन नहीं कर सके। हमने अपने सम्मान को रखते हुए खाना नहीं खाया और बिना खाए ही पार्टी से लौट गए।