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प्रसुताओं पर संकट, फिर आमने-सामने हुईं ये डॉक्टर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 15 Apr 2017 09:35 PM IST
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चिड़ावा के राजकीय अस्पताल में दो महिला डॉक्टरों की आपसी खींचतान थमने का नाम ही नहीं ले रही। शनिवार को भी दोनों डॉक्टर एक प्रसुता की सिजेरियन डिलिवरी को लेकर आमने-सामने हो गई।
जानकारी के अनुसार बेरला निवासी महिला सुशीला को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन 13 अप्रेल को राजकीय अस्पताल में लेकर आए। यहां 14 तारीख को भी प्रसव नहीं हुआ। डॉ.शिवा चाहर ने प्रसुता में खून की कमी होने के कारण एक यूनिट ब्लड चढ़ाया। मगर तय समय तक प्रसव नहीं होने के कारण डॉ.शिवा ने परिजनों को ऑपरेशन करने की सलाह दी। इस पर परिजनों ने ऑपरेशन से डिलिवरी की हामी भर दी। डॉ.शिवा ने एनेस्थेसिया के लिए डॉ.सुमित्रा ओला को बुलाया, मगर सुमित्रा ने रैफर करने की बात कही। इस पर दोनों डॉक्टरों में कहासुनी हो गई। शनिवार सुबह नौ बजे तक प्रसव नहीं होने व प्रसुता की हालत लगातार खराब होने के कारण परिजनों ने डॉक्टरों पर प्रसव का दबाव डाला।
इस पर डॉ.शिवा ने डॉ.ओला को ऑपरेशन के लिए मरीज को बेहोश करने का आग्रह किया। इस पर डॉ.ओला ने परिजनों को कहा कि फार्म पर साइन करो, जिसमें प्रसुता की मौत होने की जिम्मेदारी परिजनों द्वारा लिए जाने की बात लिखी थी। इस पर परिजन महेंद्र सिंह ने फार्म पर हस्ताक्षर कर दिए। तब जाकर प्रसुता को ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया। यहां भी आॅपरेशन से पहले किसी बात पर दोनों डॉक्टर उलझ गई। करीब आधा घंटा तक कहासुनी होती रही। मीडिया व अन्य लोगों के पहुंचने पर मामला शांत हुआ। इस दौरान ऑपरेशन से प्रसुता ने शिशु को जन्म दिया। गौरतलब है कि फरवरी में भी सुल्ताना निवासी मुबारिक लीलगर को पांच घंटे तक तड़पने के बाद यहां से रैफर किया गया, जिसके चलते उसकी बच्चे को बचाया नहीं जा सका था।
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जानकारी के अनुसार बेरला निवासी महिला सुशीला को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन 13 अप्रेल को राजकीय अस्पताल में लेकर आए। यहां 14 तारीख को भी प्रसव नहीं हुआ। डॉ.शिवा चाहर ने प्रसुता में खून की कमी होने के कारण एक यूनिट ब्लड चढ़ाया। मगर तय समय तक प्रसव नहीं होने के कारण डॉ.शिवा ने परिजनों को ऑपरेशन करने की सलाह दी। इस पर परिजनों ने ऑपरेशन से डिलिवरी की हामी भर दी। डॉ.शिवा ने एनेस्थेसिया के लिए डॉ.सुमित्रा ओला को बुलाया, मगर सुमित्रा ने रैफर करने की बात कही। इस पर दोनों डॉक्टरों में कहासुनी हो गई। शनिवार सुबह नौ बजे तक प्रसव नहीं होने व प्रसुता की हालत लगातार खराब होने के कारण परिजनों ने डॉक्टरों पर प्रसव का दबाव डाला।
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इस पर डॉ.शिवा ने डॉ.ओला को ऑपरेशन के लिए मरीज को बेहोश करने का आग्रह किया। इस पर डॉ.ओला ने परिजनों को कहा कि फार्म पर साइन करो, जिसमें प्रसुता की मौत होने की जिम्मेदारी परिजनों द्वारा लिए जाने की बात लिखी थी। इस पर परिजन महेंद्र सिंह ने फार्म पर हस्ताक्षर कर दिए। तब जाकर प्रसुता को ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया। यहां भी आॅपरेशन से पहले किसी बात पर दोनों डॉक्टर उलझ गई। करीब आधा घंटा तक कहासुनी होती रही। मीडिया व अन्य लोगों के पहुंचने पर मामला शांत हुआ। इस दौरान ऑपरेशन से प्रसुता ने शिशु को जन्म दिया। गौरतलब है कि फरवरी में भी सुल्ताना निवासी मुबारिक लीलगर को पांच घंटे तक तड़पने के बाद यहां से रैफर किया गया, जिसके चलते उसकी बच्चे को बचाया नहीं जा सका था।
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