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अक्षय तृतीया: क्यों है सरकार चौकन्नी और प्रदेश की बच्चियां चिंतित

Fri, 28 Apr 2017 10:45 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Fri, 28 Apr 2017 10:45 AM IST
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child marriage could take place at the occasion of akshaya tritiya
फाइल फोटो।

राजस्थान के लिए प्रतिवर्ष अक्षय तृतीया का दिन काफी खास होता है। जिसका कारण इस दिन बड़ी संख्या में होने वाले बाल विवाह। शुक्रवार को अक्षय तृतीया के मौके पर प्रदेश में कोई बाल विवाह नहीं हो सके इसके लिए पुलिस व प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए है। हाल ही में जोधपुर में बाल विवाह से सम्बधित दो मामले भी सामने आए थे।

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हालांकि यह भी सच्चाई कि राजस्थान देश के उन चुनिंदा राज्यों में सम्मलित है जहां बाल विवाह जैसी कुप्रथा अभी भी प्रचलित है। सरकार भी मानती है कि प्रदेश में अभी भी करीब 35 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम की उम्र में हो रही है। जिसमें अधिकतर शादी अक्षय तृतीया के मौके पर होती है। जबकि सामाजिक चिंतकों के अनुसार बाल विवाह का वास्तविक आंकड़ा सरकारी आंकड़ें से कही अधिक है। सरकार ने भी इसे रोकने के लिए कई उपाय किए हैं।
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प्रदेश भर में शुक्रवार को बाल विवाह को रोकने के लिए विभिन्न टीमों का गठन किया गया है। जिनकी मॉनिटरिंग जिले के प्रमुख अधिकारी स्वयं करेंगे। महिला बाल विकास विभाग की ओर से पिछले काफी समय से इसके लिए जागरुकता अभियान भी संचालित किया जा रहा है।
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पंडितों, नाई, बैंडवालों, टैंटवालों पर रहेगी नजर

सरकार ने पुलिस विभाग से कहा है कि उन लोगों पर नजर रखी जाए, जिन पर विवाह की रस्म निभाने की जिम्मेदारी होती है। ये लोग अपने-आप वहां पहुंचा सकते हैं, जहां बाल विवाह हो रहा हो। इसके अतिरिक्त जन प्रतिनिधियों व ग्राम सेवकों से भी बाल विवाह पर नजर रखने के लिए कहा गया है। सरकार ने अपने आदेश में पुलिस व प्रशासन से पंडित, कैटरर, वीडियोग्राफर, नाई, बैण्डवालों व टैंट का सामान उपलब्ध कराने वालों पर सख्ती से नजर रखने के लिए कहा है।


यही नहीं, शुक्रवार को स्कूलों में बच्चों की अनुपस्थिति को गम्भीरता से लिया जाएगा। यदि किसी बच्चे का बाल विवाह हुआ है, तो शिक्षक व प्रिंसिपल को नोटिस जारी किए जाएंगे। सरकार ने बाल विवाह की जानकारी तुरंत चाइल्ड हेल्प लाइन नं. 1098 और पुलिस कंट्रोल रूम 100 पर देने के लिए कहा है, जिससे तुरंत कार्रवाई हो सके।

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