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ब्रिटिश रॉयल फैमिली जलियांवाला बाग के लिए भारतीयों से मांगे माफी- थरूर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 28 Jan 2018 05:12 PM IST
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shashi Tharoor
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सांसद और लेखक शशि थरूर ने कहा है कि अंग्रेजों को जलियाबाला बाग जैसे हत्याकांड के लिए भारतीयों से माफी मांगनी चाहिए।
थरूर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक सेशन में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपनी किताब'अंधकार काल' के बारे में भी बताया। थरूर ने कहा कि अंग्रेजों के कारण ही भारत में अकाल की वजह से करोड़ों लोगों की जान गई। बंगाल के अकाल के समय लोग मर रहे थें और अंग्रेज अपने यहां बफर स्टॉक के लिए अपने देश अनाज भेज रहे थे।
जलियांवाला बाग जैसी घटना पर उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि अंग्रेज राजपरिवार को यहां जलियांवाला बाग आकर भारत के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। इसे लेकर वहां के भारतीय मूल के एक सांसद मुहिम भी चला रहे हैं। हालांकि लगता नहीं है कि अंग्रेज ऐसा करेंगे, क्योकि उन्हें ऐसे में बहुत सी बातों के लिए माफी मांगनी पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं हिन्दी का विरोधी नहीं हूं, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि हिन्दी सभी भारतीयों की भाषा है।
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थरूर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक सेशन में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपनी किताब'अंधकार काल' के बारे में भी बताया। थरूर ने कहा कि अंग्रेजों के कारण ही भारत में अकाल की वजह से करोड़ों लोगों की जान गई। बंगाल के अकाल के समय लोग मर रहे थें और अंग्रेज अपने यहां बफर स्टॉक के लिए अपने देश अनाज भेज रहे थे।
जलियांवाला बाग जैसी घटना पर उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि अंग्रेज राजपरिवार को यहां जलियांवाला बाग आकर भारत के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। इसे लेकर वहां के भारतीय मूल के एक सांसद मुहिम भी चला रहे हैं। हालांकि लगता नहीं है कि अंग्रेज ऐसा करेंगे, क्योकि उन्हें ऐसे में बहुत सी बातों के लिए माफी मांगनी पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं हिन्दी का विरोधी नहीं हूं, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि हिन्दी सभी भारतीयों की भाषा है।
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लंदन के म्यूजियम चोर बाजार की तरह
Shashi Tharoor
जब उनसे पूछा गया कि क्या अंग्रेज राजपरिवार के माफी वाले मामले पर वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सहयोग लेना चाहेंगे तो थरूर सवाल टाल गए और बोले कि कुछ सवालों का जवाब नहीं देना ही बेहतर होता है।
इस किताब को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से मिल रही तारीफों पर थरूर ने कहा कि किताब में ऐसा कुछ है ही नहीं जिससे किसी को कोई दिक्कत हो। मैंने जो लिखा है, उससे हर भारतीय सहमत होगा। कोहीनूर की वापसी के सवाल पर थरूर ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि कोहीनूर वापस हो पाएगा, क्योंकि लंदन में जितने संग्रहालय है, वे बड़े चोर बाजार की तरह है जहां पर ज्यादातर चीजें इधर-उधर से चुरा कर लाई गई हैं।
गांधी के अंहिसक आंदोलन के बारे में किताब में की गई टिप्पणी पर थरूर ने कहा कि गांधी के अंहिसक आंदोलन को अंग्रेज तो समझ गए और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जो कुछ किया, वह बिल्कुल सही था, लेकिन सवाल यह है कि हिटलर या आज के आतंकवादियों की सोच के आगे गांधी के उपवास क्या असर डाल पाएंगे। हमें यह तो देखना ही होगा कि हमारा दुश्मन कैसा है।
इस किताब को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से मिल रही तारीफों पर थरूर ने कहा कि किताब में ऐसा कुछ है ही नहीं जिससे किसी को कोई दिक्कत हो। मैंने जो लिखा है, उससे हर भारतीय सहमत होगा। कोहीनूर की वापसी के सवाल पर थरूर ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि कोहीनूर वापस हो पाएगा, क्योंकि लंदन में जितने संग्रहालय है, वे बड़े चोर बाजार की तरह है जहां पर ज्यादातर चीजें इधर-उधर से चुरा कर लाई गई हैं।
गांधी के अंहिसक आंदोलन के बारे में किताब में की गई टिप्पणी पर थरूर ने कहा कि गांधी के अंहिसक आंदोलन को अंग्रेज तो समझ गए और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जो कुछ किया, वह बिल्कुल सही था, लेकिन सवाल यह है कि हिटलर या आज के आतंकवादियों की सोच के आगे गांधी के उपवास क्या असर डाल पाएंगे। हमें यह तो देखना ही होगा कि हमारा दुश्मन कैसा है।