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तो इसलिए घोड़ी पर सवार हुई 'बेटी' और जश्न में मग्न हुआ शहर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 13 Nov 2017 07:31 PM IST
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सीकर में घोड़ी पर बैठी दिव्यांशी
- फोटो : अमर उजाला
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एक तरफ तो लोग बेटे की चाह में बेटियों को कोख में मार रहे हैं, दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बेटियों को बेटों से ज्यादा मानकर सम्मान दे रहे हैं।
इस तरह का उदाहरण पेश किया है राजस्थान के शेखावाटी इलाके के मंडावा कस्बा स्थित लाहोरा परिवार ने। लिंगानुपात में अव्वल झुंझनूं जिले के मंडावा कस्बे के इस परिवार ने बेटी की शादी में उसको घोड़ी पर चढ़ा कर गाजे बाजे से बिंदौरी निकाल कर समाज को संदेश देने का प्रयास किया।
मंडावा निवासी कैलाश किशन लाहोरा की पुत्री दिव्यांशी का विवाह दिल्ली के ललित से होना तय किया गया है। रविवार शाम परिवार के लोगों ने लाड़ली बेटी को घोड़ी पर बैठाकर गाजे-बाजे के साथ उसकी बिंदौरी निकाली।
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इस तरह का उदाहरण पेश किया है राजस्थान के शेखावाटी इलाके के मंडावा कस्बा स्थित लाहोरा परिवार ने। लिंगानुपात में अव्वल झुंझनूं जिले के मंडावा कस्बे के इस परिवार ने बेटी की शादी में उसको घोड़ी पर चढ़ा कर गाजे बाजे से बिंदौरी निकाल कर समाज को संदेश देने का प्रयास किया।
मंडावा निवासी कैलाश किशन लाहोरा की पुत्री दिव्यांशी का विवाह दिल्ली के ललित से होना तय किया गया है। रविवार शाम परिवार के लोगों ने लाड़ली बेटी को घोड़ी पर बैठाकर गाजे-बाजे के साथ उसकी बिंदौरी निकाली।
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'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' को मिलेगी गति
परिवार जनों के साथ दिव्यांशी
- फोटो : अमर उजाला
उसकी बिंदौरी में कस्बे के राजनेता, गणमान्य लोग शामिल हुए और आयोजन की सराहना की। दिव्यांशी के चाचा सूर्यप्रकाश लाहोरा ने बताया कि उनकी नजर में बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं है।
वे समाज को यही संदेश देना चाहते हैं। उन्हें आशा है कि उनके इस कदम से 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान को गति मिलेगी। गौरतलब है कि झुंझनूं जिला लिंगानुपात में राज्य में पहले स्थान पर है।
वे समाज को यही संदेश देना चाहते हैं। उन्हें आशा है कि उनके इस कदम से 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान को गति मिलेगी। गौरतलब है कि झुंझनूं जिला लिंगानुपात में राज्य में पहले स्थान पर है।