{"_id":"594e6ce64f1c1bd2678b473e","slug":"bride-and-bridal-should-salute-the-martyrs-after-marrige","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहीदों को देवता की तरह पूजने की अपील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहीदों को देवता की तरह पूजने की अपील
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 24 Jun 2017 08:08 PM IST
विज्ञापन
शहीदों के परिवार के साथ बाजौर व अन्य लोग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान में सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजौर ने शहीदों को देवता की तरह पूजने की लोगों से अपील की है।
बाजौर ने यह अपील शहीद सम्मान यात्रा के दूसरे चरण के पांचवे दिन सूजरगढ़, झुंझुनू और बुहाना पंचायत समिति के 19 गांवों के 28 शहीदों की आश्रितों के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में की। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में शहीद की मूर्तियां लगी हैं, उस गांव में नवविवाहित जोड़े को शहीद की मूर्ति के आगे धोक लगवाने की परम्परा शुरु की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शहीद किसी एक परिवार, जाति और धर्म का नहीं होता, बल्कि वह देश की सवा सौ करोड़ जनता की धरोहर है। हमें उनके मान ओर सम्मान में किसी तरह की कमी नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाला समय ऐसा होगा जिसमें हमें शहीद को देवता के रूप में मानना ही होगा। उन्होंने कहा कि वे गांव भाग्यशाली हैं, जिनके लाड़ले ने देश के लिए बलिदान देकर गांव और जिले का गौरव बढ़ाया है। मूर्ति स्थलों पर पूजा-पाठ के अलावा जात-जडूले और सवामणी के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि देश में झुंझुंनू ऐसा जिला है, जिसने सेना में भागीदारी और बलिदान देने में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।
विज्ञापन
बाजौर ने यह अपील शहीद सम्मान यात्रा के दूसरे चरण के पांचवे दिन सूजरगढ़, झुंझुनू और बुहाना पंचायत समिति के 19 गांवों के 28 शहीदों की आश्रितों के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में की। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में शहीद की मूर्तियां लगी हैं, उस गांव में नवविवाहित जोड़े को शहीद की मूर्ति के आगे धोक लगवाने की परम्परा शुरु की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शहीद किसी एक परिवार, जाति और धर्म का नहीं होता, बल्कि वह देश की सवा सौ करोड़ जनता की धरोहर है। हमें उनके मान ओर सम्मान में किसी तरह की कमी नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाला समय ऐसा होगा जिसमें हमें शहीद को देवता के रूप में मानना ही होगा। उन्होंने कहा कि वे गांव भाग्यशाली हैं, जिनके लाड़ले ने देश के लिए बलिदान देकर गांव और जिले का गौरव बढ़ाया है। मूर्ति स्थलों पर पूजा-पाठ के अलावा जात-जडूले और सवामणी के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि देश में झुंझुंनू ऐसा जिला है, जिसने सेना में भागीदारी और बलिदान देने में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।
विज्ञापन