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सीएम राजे बंगला नंबर 13 में क्यों रहती है, बीजेपी एमएलए ने खोला ये राज

Fri, 12 May 2017 09:54 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Fri, 12 May 2017 09:54 PM IST
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bjp mla ghanshyam tiwari anti cm raje programme
घनश्याम तिवाड़ी - फोटो : file photo
राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सीएम हाउस को छोड़ कर दूसरे बंगले में रहने की कथित मंशा की शिकायत भाजपा के विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने राज्यपाल को दी है। उन्होंने राज्यपाल कल्याण सिंह को भेजे एक पत्र में इस मामले में सीएम राजे पर सामन्तशाही का खुला आरोप लगाया है।  
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भाजपा विधायक और दीनदयाल वाहिनी के प्रदेशाध्यक्ष तिवाड़ी अपनी ही पार्टी में बगावत पर उतर आए है। उनके इस व्यवहार को लेकर केंद्र स्तर से अनुशासनहीनता का नोटिस भी जारी किया है। इस नोटिस के बाद उनके तेवर और तीखे हो गए है। तिवाड़ी ने शुक्रवार को शुक्रवार को राज्यपाल को पत्र भेजकर ‘राजस्थान मंत्री वेतन विधेयक 2017’ पर हस्ताक्षर न करने की मांग की है। 
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इस पत्र में उन्होंने इस विधेयक के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्रियों को कानून बनाकर जीवनभर के लिए असामान्य सुविधाएं देने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक जागीरदारी प्रथा को स्थापित किए जाने का प्रयास है। इस पत्र में घनश्याम तिवाड़ी ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सिविल लाइंस में बंगला नम्बर 13 में रहने की कथित मंशा की भी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा इस विधेयक के बहाने सीएम राजे इस बंगले पर आजन्म कब्जे का प्रयास कर रही है। 13 नं. बंगले पर सरकार के करोड़ों रूपया खर्च कर इसे एक आलीशान महल में बदल दिया गया है और बाहर से इसकी किले बंदी कर दी गई है। इस संपदा का बाजार मूल्य कम से कम 2000 करोड़ रुपए है। 
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उन्होंने यह अपने पत्र में यह सवाल भी किया है कि जब 8 सिविल लाइंस का सरकारी आवास मुख्यमंत्री आवास के रूप में कानूनी रूप से चिन्हित था, तो 13 सिविल लाइंस को मुख्यमंत्री आवास के तौर पर क्यो उपयोग क्यों लिया जा रहा है? एक मुख्यमंत्री एक साथ दो मुख्यमंत्रियों के बराबर राज्य की संपदा का उपयोग कर रही है। 


गत वर्ष अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करने का निर्देश दिया। इसके अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री जीवनभर सरकारी बंगलों में नहीं रह सकते है। ऐसे में इस विधेयक के पीछे एजेंडा को समझते हुए राज्यपाल से विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करने का निवेदन किया है। 
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