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हाईकोर्ट हुआ सख्त तो तीन घंटे में जारी हुआ Appointment letter
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 07 Sep 2017 07:11 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से एएनएम भर्ती-2013 के ओबीसी वर्ग में नियुक्ति नहीं देने पर सख्ती दिखाने पर चिकित्सा विभाग ने तीन घंटे में अभ्यर्थी का नियुक्ति पत्र जारी कर अदालत में पालना रिपोर्ट पेश कर दी। रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने करीब सात माह से लंबित अवमानना याचिका का निस्तारण कर दिया।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश उषा रानी व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता एएनएम भर्ती-2013 की वरीयता सूची में आई थी, लेकिन विभाग ने उसे प्रदेश के बाहर का अभ्यर्थी बताकर ओबीसी वर्ग में शामिल करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने गत 28 फरवरी को याचिकाकर्ता को ओबीसी वर्ग में शामिल करते हुए नियुक्ति देने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद भी आदेश की पालना नहीं की गई।
आज सुनवाई के दौरान पूर्व में दिए आदेश की पालना में प्रमुख चिकित्सा सचिव वीनू गुप्ता पेश नहीं हुई। इस पर अदालत ने गुप्ता के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने की मंशा जताते हुए कहा कि दो बजे तक आदेश की पालना की जाए। अदालत में दो बजे सुनवाई होने पर विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने नियुक्ति पत्र के साथ पालना रिपोर्ट पेश कर दी। जिसे रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने अवमानना याचिका का निस्तारण कर दिया।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश उषा रानी व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता एएनएम भर्ती-2013 की वरीयता सूची में आई थी, लेकिन विभाग ने उसे प्रदेश के बाहर का अभ्यर्थी बताकर ओबीसी वर्ग में शामिल करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने गत 28 फरवरी को याचिकाकर्ता को ओबीसी वर्ग में शामिल करते हुए नियुक्ति देने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद भी आदेश की पालना नहीं की गई।
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आज सुनवाई के दौरान पूर्व में दिए आदेश की पालना में प्रमुख चिकित्सा सचिव वीनू गुप्ता पेश नहीं हुई। इस पर अदालत ने गुप्ता के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने की मंशा जताते हुए कहा कि दो बजे तक आदेश की पालना की जाए। अदालत में दो बजे सुनवाई होने पर विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने नियुक्ति पत्र के साथ पालना रिपोर्ट पेश कर दी। जिसे रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने अवमानना याचिका का निस्तारण कर दिया।
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