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आनंदपाल एनकाउंटर: फौजी बनाने का सपना.... पर आनंदपाल बन गया गैंगस्टर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 25 Jun 2017 02:16 PM IST
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आनंदपाल
- फोटो : फाइल फोटो
मां बाप की आंखों में उसे फौजी बनाने का सपना था तो वह खुद गांव में ही जनप्रतिनिधि बन राजनीति में उतरना चाहता था। आम से लगने वाला एक नौजवान पांच राज्यों की पुलिस को छकाने वाला गैंगस्टर बन गया। आनंदपाल सिंह मूल रूप से नागौर के लाडनूं तहसील के गांव सांवराद का रहने वाला था।
परिवार वालों की मानें तो जो आनंदपाल लोगों के लिए कुख्यात अपराधी और दहशत का दूसरा नाम था, एक वक्त वह बेहद सादा रहने वाला युवक था। वह उनके लिए ऐसा शख्स था जिसने गांव में कभी किसी से बेअदबी से बात तक नहीं की। फिर कैसे हालात बदलते गए और एक युवक दाउद इब्राहिम को रोल मॉडल मानने वाला गैंग सरगना बन गया।
जानकारी के मुताबिक आनंदपाल की पत्नी और बच्चे जयपुर में रहते हैं और उसकी मां और दादी लाडनूं में रहते हैं। मां के घर को देखकर लगता नहीं कि इतने बड़े गैंगस्टर का घर इतना सादा हो सकता है।
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परिवार वालों की मानें तो जो आनंदपाल लोगों के लिए कुख्यात अपराधी और दहशत का दूसरा नाम था, एक वक्त वह बेहद सादा रहने वाला युवक था। वह उनके लिए ऐसा शख्स था जिसने गांव में कभी किसी से बेअदबी से बात तक नहीं की। फिर कैसे हालात बदलते गए और एक युवक दाउद इब्राहिम को रोल मॉडल मानने वाला गैंग सरगना बन गया।
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जानकारी के मुताबिक आनंदपाल की पत्नी और बच्चे जयपुर में रहते हैं और उसकी मां और दादी लाडनूं में रहते हैं। मां के घर को देखकर लगता नहीं कि इतने बड़े गैंगस्टर का घर इतना सादा हो सकता है।
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चुनाव हारा तो अपराध की ओर बढ़ा
गैंगस्टर आनंदपाल
- फोटो : File
जानकारी के मुताबिक आनंदपाल की मां निर्मल कंवर और पिता हुकुम सिंह की ख्वाहिश थी कि वह फौजी बने। आनंदपाल जवानी के दिनों में स्थानीय राजनीति में उतरना चाहता था। इस दौरान ही उस पर अलग अलग मामले दर्ज होते गए। इसके बाद वह जीवन गोदारा हत्याकांड में लिप्त रहा। फिर तो जैसे अपराधों का सिलसिला चल ही गया। इस तरह एक आम जवान अपराध की दुनिया का एक कुख्यात नाम बन गया।
साल 2000 में आनंदपाल ने प्रधानी का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया। इसके बाद उस पर लूट और मारपीट के आरोप लगे। फिर अशोक गहलोत पर पथराव करने की बात भी सामने आई। छह साल बाद गोदारा हत्याकांड से नाम चर्चा में आया। साल 2012 में गिरफ्तारी हुई।
साल 2000 में आनंदपाल ने प्रधानी का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया। इसके बाद उस पर लूट और मारपीट के आरोप लगे। फिर अशोक गहलोत पर पथराव करने की बात भी सामने आई। छह साल बाद गोदारा हत्याकांड से नाम चर्चा में आया। साल 2012 में गिरफ्तारी हुई।