किशोरी व युवक को पेड़ से बांध चार घंटे तक लगाते रहे तमाचे, दी खौफनाक सजा
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कानून हाथ में लेना और स्वयं की सजा का ऐलान कर देना यह कई गावों के लोगों के लिए आम हो गया है। ग्रामीणों ने एक युवक व नाबालिग किशोरी को गांव के बीचों-बीच पेड़ से बांध दिया। करीब चार घंटे तक ग्रामीण उन्हें थप्पड़ मारते रहे।
ताजा घटना झीलों की नगरी उदयपुर की है। उदयपुर शहर सटे एक गांव में ग्रामीणों ने एक युवक व नाबालिग युवती को गांव के बीचों-बीच पेड़ से बांध दिया। पहले तो करीब चार घंटे तक दोनों पीड़ितों को पेड़ से बंधे रखा और इस दौरान चार घंटे तक ग्रामीण उन्हें थप्पड़ मारते रहे।
फिर गांव के ही कुछ लोगों ने उनकी फोटों खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। फोटो वायरल होने के बाद घटना सामने आई है। हालांकि पुलिस को भी इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया से ही मिली है।
लेकिन जो भी अपने मोबाइल पर इन फोटोज को देख रहा है, एेसी हैवानियत देखकर उसके दिल में दर्द जरूर उठ रहा है। ग्रामीणों ने कानून इस तरह अपने हाथ में लिया, जैसे उन्हें कानून के कायदों से कोई फर्क ही नहीं पड़ता हो।
इसलिए दी थी, इन्हें एेसी सजा, ग्रामीणों को कानून का डर नहीं
जानकारी के अनुसार दोनों का यह सजा ग्रामीणों ने इसलिए दी क्योंकि मामला प्रेम-प्रसंग से जुड़ा है और दोनों ही घर से भाग गए थे। शुक्रवार को दोनों को गांव के कुछ युवकों ने पकड़ लिया और स्वयं ही सजा देने का निर्णय किया।
जिसके परिणामस्वरुप मानवीयता की हदें पार करते हुए उन्हें पेड़ से बांध दिया। करीब चार घंटे बाद गांव के ही कुछ लोगों ने उन्हें इस चुंगल से आजाद किया। इसके बाद से दोनों पीड़ित गांव से गायब है।
वहीं दूसरी और मामले की जानकारी प्रतापनगर थाना पुलिस को सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो से मिली है।
अब मुंह छिपाते फिर रहे हैं जन प्रतिनिधि
जानकारी के अनुसार दोनों पीड़ित शादी-शुदा हैं और करीब एक सप्ताह पूर्व घर से भाग गए थे। हालांकि लड़की नाबालिग है लेकिन फिर भी उसके घरवालों ने उसकी शादी दो माह पूर्व कर दी थी। नाबालिग किशोरी के परिजनों ने बाल विवाह कर पहले ही कानून अपने हाथ में ले लिया है।
इधर, युवक लड़के की शादी दो वर्ष पूर्व हो चुकी थी। वहीं इस मामले में गांव के जनप्रतिनिधि कुछ भी कहने से बच रहे हैं। मामले को तूल पकड़ता देख अब पुलिस भी उचित कार्रवाई करने की बात कह रही है।
यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि मामला उजागर होने के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग मामले की रिपोर्ट तलब कर सकता है।