खालिस्तान लिब्रेशन चीफ को कराना चाहते थे आजाद, अब मिली यह सजा...
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कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे रामनिवास मिर्धा के बेटे राजेन्द्र सिंह मिर्धा के अपहरण केस में आज दोषी करार दिए गए हरनेक सिंह को सजा सुनाई गई। करीब 22 वर्ष पुराने इस मामले में सिंह को 364 ए में फिरौती मांगने के लिए अपहरण और जान से मारने की धमकी का दोषी पाया गया था।
आज जयपुर शहर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय क्रम-3 ने हरनेक सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही 40500 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। दरअसल खालिस्तान लिब्रेशन फ्रंट के चीफ देवेन्द्र सिंह भुल्लर की रिहाई के लिए हरनेक सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर राजेन्द्र मिर्धा का अपहरण किया था।
अपहरणकर्ताओं ने राजेंद्र मिर्धा को जयपुर के मालवीय नगर इलाके के एक मकान में छिपाकर रखा था, जिसे पुलिस ने छुड़ा लिया था।
साथियों को हो चुकी है सजा
राजेंद्र मिर्धा को छिपाकर रखने के दौरान वहां दूध देने जाने वाले हनुमान को मकान में मौजूद लोगों पर संदेह हुआ। तब उसने इसकी जानकारी मिर्धा की तलाश में जुटी जयपुर पुलिस को दी। तब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके पर नवनीत कादिया का एनकाउंटर कर राजेन्द्र मिर्धा को छुड़ाया था।
वहीं दो अन्य आरोपियों खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के प्रमुख दयासिंह लाहोरिया व उसकी पत्नी सुमन को बाद में गिरफ्तार किया गया। प्रकरण में 2004 में दयासिंह को आजीवन कारावास और उसकी पत्नी को सात साल की सजा हो चुकी है। जबकि बाद में हरनेक सिंह को गिरफ्तार किया गया। जिससे मामले की पुन: सुनवाई आरंभ हुई।