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रेत की धरा में 'ज्ञान की गंगा', पीएम मोदी का 'इंतजार'
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 23 Jul 2017 03:19 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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परमाणु परीक्षण स्थली के रूप से पहचाने जाने वाले पोकरण की एक और खास बात है। वो है यहां का विशाल पुस्तकालय।
रेगिस्तान की धरा पर शक्ति पीठ भादरिया गांव में देश का ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय होने का दावा किया जा रहा है। इस पुस्तकालय को चलाने वाली भादररिया सेवा समिति का कहना है कि इसके संस्थापक संत हरवंशसिंह महाराज का यह सपना था कि इस विशालकाय पुस्तकालय का शुभारंभ राष्ट्र भक्त के कर कमलों से हो। उनका यह सपना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरा कर सकते हैं।
दुनिया के सभी धर्मों के ग्रन्थ हो या फिर भारत के तमाम उच्च न्यायालयों के निर्णयों की पुस्तकें, छोटे बडे़ लेखकों के आलेख हो या फिर महापुरूषों की जीवन कथाएं या फिर संविधान की पुस्तकें, यहां मौजूद हैं। दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह, भारत के संविधान की मूल प्रति समेत यहां करीब आठ लाख पुस्तकों का संग्रह है।
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रेगिस्तान की धरा पर शक्ति पीठ भादरिया गांव में देश का ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय होने का दावा किया जा रहा है। इस पुस्तकालय को चलाने वाली भादररिया सेवा समिति का कहना है कि इसके संस्थापक संत हरवंशसिंह महाराज का यह सपना था कि इस विशालकाय पुस्तकालय का शुभारंभ राष्ट्र भक्त के कर कमलों से हो। उनका यह सपना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरा कर सकते हैं।
दुनिया के सभी धर्मों के ग्रन्थ हो या फिर भारत के तमाम उच्च न्यायालयों के निर्णयों की पुस्तकें, छोटे बडे़ लेखकों के आलेख हो या फिर महापुरूषों की जीवन कथाएं या फिर संविधान की पुस्तकें, यहां मौजूद हैं। दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह, भारत के संविधान की मूल प्रति समेत यहां करीब आठ लाख पुस्तकों का संग्रह है।
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शिक्षा देने से शुरू हुआ ये कार्य
पोकरण में लाइब्रेरी के कुछ नजारे
- फोटो : अमर उजाला
पोकरण के पास शक्ति पीठ भादरिया गांव में एशिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय का श्रेय संत हरवंससिंह निर्मल को जाता है। हरंवस सिंह निर्मल का जन्म 1930 में पंजाब के फिरोज जिले के समृद्व परिवार में हुआ था। घर परिवार छोड़कर वे तपस्या करने चले गए। इसके बाद 2016 में घुमते हुए वे भादरिया गांव पहुचे व भादरिया का एंकांत वास उनको पसंद आया व भादरिया शक्ति पीठ से ही सामाजिक सेवा ,शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाने का कार्य प्रारंभ किया।
मंदिर के किनारे बनी 15हजार वर्ग फीट में बना विशालकाय पुस्तकालय में तीन गुना छ फीट के आकार की 562 अलमारियों ,16000 हजार फीट लम्बी रेस्क बनाकर करीब आठ लाख पुस्तकों को स्थान दिया गया है, वहीं पुस्तकालय में 18 कमरे बनाए गए है
मंदिर के किनारे बनी 15हजार वर्ग फीट में बना विशालकाय पुस्तकालय में तीन गुना छ फीट के आकार की 562 अलमारियों ,16000 हजार फीट लम्बी रेस्क बनाकर करीब आठ लाख पुस्तकों को स्थान दिया गया है, वहीं पुस्तकालय में 18 कमरे बनाए गए है