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एक कागज और पेंसिल से बनाया विश्व रिकार्ड, डॉ. दिनेश गुप्ता का नाम 2020 के लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज
Mon, 11 May 2020 09:59 PM IST
श्रीधर मिश्रा
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Mon, 11 May 2020 09:59 PM IST
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Dr Dinesh Gupta
- फोटो : Amar Ujala
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भारत के गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड का दर्जा प्राप्त करने वाली 30 वर्ष की लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में मुंबई में रहने वाले प्रो. डॉ. दिनेश गुप्ता का भी नाम दर्ज हो गया है। डॉ. गुप्ता ने 24 घंटे पेंसिल और स्केच मैरॉथन में रिकॉर्ड बनाया है।
डॉ. गुप्ता ने 24 घंटे ए-थ्री साईज के ड्राईंग पेपर पर 6-बी पैंसिल से अलग-अलग स्केच बनाए, जिसमें मानवीय चेहरे, नेचर ड्राईंग, ऑब्जेक्ट पेंटिंग, फूल, वस्तुएं, मेमोरी आर्ट, एब्सट्रेक्ट आर्ट शामिल हैं।
यह विश्व रिकॉर्ड उन्होंने पिछले वर्ष 5 अप्रैल से लेकर 6 अप्रैल को मुंबई के करीब कल्याण के खड्कपाड़ा स्थित डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर आर्ट गैलरी में लगातार पेंसिल स्क्रेच के जरिए बनाया था। इस दौरान शहर की महापौर वनिता राणे, पूर्व विधायक सुखदेव भोईर समेत पार्षद सुनील वायरे, आर्यभट्ट अकेडमी के संचालक भूपेन्द्र सिंह और एज्युकेशन लर्निंग सिस्टम के संचालक प्रदीप यादव तथा शांतनु गुप्ता आदि उपस्थित थे।
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डॉ. दिनेश गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के निवासी हैं। वह मोटिवेटर स्पीकर, आध्यात्मिक व्याख्याता, माइंडसेट कोच, लेखक तथा गोल्डमेडलिस्ट मेकैनिकल इंजीनियर हैं। इस रिकॉर्ड को बनाने के पीछे उनका मकसद सुप्त शक्तियों को जगाकर यह जताना था कि व्यक्ति अगर ठान ले, तो वह हर कार्य कर सकता है।
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डॉ. गुप्ता ने 24 घंटे ए-थ्री साईज के ड्राईंग पेपर पर 6-बी पैंसिल से अलग-अलग स्केच बनाए, जिसमें मानवीय चेहरे, नेचर ड्राईंग, ऑब्जेक्ट पेंटिंग, फूल, वस्तुएं, मेमोरी आर्ट, एब्सट्रेक्ट आर्ट शामिल हैं।
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यह विश्व रिकॉर्ड उन्होंने पिछले वर्ष 5 अप्रैल से लेकर 6 अप्रैल को मुंबई के करीब कल्याण के खड्कपाड़ा स्थित डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर आर्ट गैलरी में लगातार पेंसिल स्क्रेच के जरिए बनाया था। इस दौरान शहर की महापौर वनिता राणे, पूर्व विधायक सुखदेव भोईर समेत पार्षद सुनील वायरे, आर्यभट्ट अकेडमी के संचालक भूपेन्द्र सिंह और एज्युकेशन लर्निंग सिस्टम के संचालक प्रदीप यादव तथा शांतनु गुप्ता आदि उपस्थित थे।
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डॉ. दिनेश गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के निवासी हैं। वह मोटिवेटर स्पीकर, आध्यात्मिक व्याख्याता, माइंडसेट कोच, लेखक तथा गोल्डमेडलिस्ट मेकैनिकल इंजीनियर हैं। इस रिकॉर्ड को बनाने के पीछे उनका मकसद सुप्त शक्तियों को जगाकर यह जताना था कि व्यक्ति अगर ठान ले, तो वह हर कार्य कर सकता है।