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एक्सप्लेनर: कौन है अमेरिकी मैथ्यू वान डाइक, जिस पर UAPA केस हटने से भारत में मचा सियासी घमासान, मामला क्या?
Wed, 09 Sep 2026 05:54 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 09 Sep 2026 05:54 PM IST
सार
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वान डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों पर एनआईए चार्जशीट से यूएपीए हटाए जाने पर विवाद गहराया। जानिए कौन हैं मैथ्यू वान डाइक और क्या है पूरा मामला।
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मैथ्यू वान डाइक मामले में भारत में सियासी घमासान।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इस साल मार्च में कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़े गए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वान डाइक को लेकर भारत में छह महीने बाद राजनीति गरमा गई है। दरअसल, वान डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को 13 मार्च को गिरफ्तार किए जाने के बाद इनके खिलाफ देश की आतंक-रोधी एजेंसी- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच कर रही थी। मंगलवार (8 सितंबर) को एनआईए ने विशेष अदालत के सामने मामले की पहली चार्जशीट दाखिल की। इसमें वान डाइक समेत सभी सात आरोपियों पर आव्रजन और अवैध गतिविधियों के मामलों में तो आरोप बरकरार रखे गए हैं, लेकिन आतंक-रोधी कानून यूएपीए की धाराएं हटा ली गई हैं, जो कि गिरफ्तारी के बाद जांच के दौरान लगाई गई थी। एनआईए के वान डाइक से यूएपीए की धाराएं हटाने को लेकर कांग्रेस से लेकर एआईएमआईएम तक ने अब केंद्र सरकार को घेरा है और उस पर अमेरिका के दबाव में होने का आरोप लगाया है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह मैथ्यू एरॉन वान डाइक कौन है? उसे छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ कब-क्यों गिरफ्तार किया गया? एनआईए ने उससे जुड़े मामले में शुरुआत में क्या आरोप तय किए थे? अब एनआईए की तरफ से जो चार्जशीट दाखिल की गई है, उसमें क्या कहा गया? इस चार्जशीट पर भारत की सियासत में सरगर्मियां कैसे तेज हो गईं? आइये जानते हैं...
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह मैथ्यू एरॉन वान डाइक कौन है? उसे छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ कब-क्यों गिरफ्तार किया गया? एनआईए ने उससे जुड़े मामले में शुरुआत में क्या आरोप तय किए थे? अब एनआईए की तरफ से जो चार्जशीट दाखिल की गई है, उसमें क्या कहा गया? इस चार्जशीट पर भारत की सियासत में सरगर्मियां कैसे तेज हो गईं? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- मैथ्यू एरॉन वान डाइक कौन हैं?
1. अमेरिकी सेना के साथ युद्ध का अनुभव
मैथ्यू वान डाइक।
- फोटो : अमर उजाला
2. गद्दाफी शासन के दौरान विद्रोही लड़ाकों में शामिल रहे
3. युद्ध क्षेत्र के खतरों के बीच डॉक्यूमेंट्री बनाई
4. सैन्य प्रशिक्षण के लिए बनाया मुखौटा संगठन
- मैथ्यू वान डाइक 2011 के लीबिया गृहयुद्ध के दौरान मुअम्मर गद्दाफी के शासन के खिलाफ विद्रोही लड़ाकों में शामिल हुए थे। एक अमेरिकी नागरिक के लीबिया में इस तरह सैन्य शासन के खिलाफ खड़े होने के बाद वान डाइक की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरू हो गई थी।
- मार्च 2011 में लीबिया की सेना ने ब्रेगा में उन्हें घात लगाकर बंदी बना लिया गया। उन्होंने गद्दाफी की जेलों में लगभग छह महीने कारावास में बिताए। हालांकि, गद्दाफी के मारे जाने के बाद वे अगस्त 2011 में जेल से भागने में सफल रहे।
3. युद्ध क्षेत्र के खतरों के बीच डॉक्यूमेंट्री बनाई
- लीबिया में अपने युद्ध और जेल के फुटेज के आधार पर वान डाइक ने पॉइंट एंड शूट नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई, इसने प्रतिष्ठित ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का अवॉर्ड जीता।
- वान डाइक सीरिया में रूस समर्थिक राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ गृहयुद्ध में भी कूदे। यहां उन्होंने नॉट एनीमोर: अ स्टोरी ऑफ रेवोल्यूशन डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन किया और साथी पत्रकार जेम्स फोली की हत्या के बाद बनी डॉक्यूमेंट्री जिम: दे जेम्स फोली स्टोरी (2016) में सिनेमैटोग्राफर के तौर पर में कार्य किया।
4. सैन्य प्रशिक्षण के लिए बनाया मुखौटा संगठन
मैथ्यू वान डाइक।
- फोटो : अमर उजाला
भारत में कैसे गिरफ्तार हो गए वान डाइक?
मैथ्यू एरॉन वान डाइक की भारत में गिरफ्तारी एक जुबान फिसलने की घटना और इमिग्रेशन अधिकारियों की मुस्तैदी के चलते हुई थी। दरअसल हुआ कुछ यूं....- 13 मार्च 2026 को वान डाइक भारत से एक दक्षिण एशियाई देश (नाम का खुलासा नहीं) की यात्रा करने के लिए कोलकाता हवाई अड्डे पर थे।
- इमिग्रेशन काउंटर पर जब अधिकारी ने उनसे भारत में घूमने पर सवाल किया, तो वान डाइक की जुबान फिसल गई और उन्होंने मिजोरम जाने की बात कह दी।
- बता दें कि भारत में पूर्वोत्तर के राज्यों में जाने के लिए विदेशी नागरिकों के पास प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (पीएपी) होना अनिवार्य रूप से जरूरी है।
- जब इमिग्रेशन अधिकारी ने उनसे यह परमिट मांगा, तो वान डाइक इसे पेश नहीं कर सके। इसके बाद अधिकारी ने तुरंत उन्हें विस्तृत पूछताछ के लिए अलग बिठा दिया।
- यहां पूछताछ में हुए खुलासों के बाद लखनऊ एयरपोर्ट से छह यूक्रेनी नागरिक पकड़े गए। बाद में सभी को गिरफ्तार किया गया और जांच एनआईए के पास चली गई।
वान डाइक ने ऐसा क्या खुलासा किया कि लग गया यूएपीए?
- कोलकाता एयरपोर्ट पर आव्रजन अधिकारियों से पूछताछ में वान डाइक ने खुलासा किया वे और उनके कुछ साथी पर्यटक वीजा पर भारत आए और बिना परमिट के असम होते हुए मिजोरम गए। वहां से वे अवैध रूप से म्यांमार की सीमा में घुसे।
- म्यांमार के विक्टोरिया कैंप पहुंचकर उन्होंने वहां के जनजातीय सशस्त्र समूहों, जैसे- कुकी-चिन आर्मी को ड्रोन युद्ध, संचालन, असेंबली और जैमिंग तकनीक का प्रशिक्षण दिया था। इसके अलावा यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार में ड्रोन की खेप भेजे जाने का भी खुलासा हुआ।
जांच एजेंसियों ने वान डाइक का पूरा नेटवर्क कैसे पकड़ा?
- वान डाइक के पकड़े जाने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उनके रिकॉर्ड्स और होटलों की सी-फॉर्म' प्रणाली की जांच की। इस सिस्टम पर विदेश से आने वाले पर्यटकों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाती है।
- विश्लेषण पर सामने आया कि वान डाइक के साथ छह यूक्रेनी नागरिक भी जुड़े थे। इनकी पहचान की गई और उन्हें देश से बाहर भागने से पहले ही लखनऊ, दिल्ली के हवाई अड्डों से गिरफ्तार कर लिया गया।
एनआईए ने उससे जुड़े मामले में शुरुआत में क्या आरोप तय किए थे?
- मामले की शुरुआत में एनआईए ने वान डाइक और बाकी आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 18 (आपराधिक साजिश के लिए सजा) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
- जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया था कि आरोपी भारत-विरोधी प्रतिबंधित संगठनों से संपर्क में हैं और उन्हें ड्रोन तकनीक की तस्करी कर रहे हैं। साथ ही उन पर म्यांमार में सशस्त्र समूहों को युद्ध प्रशिक्षण देने की एक बड़ी आतंकवादी साजिश में शामिल होने के आरोप लगे।
अब एनआईए की तरफ से दाखिल चार्जशीट में क्या आरोप तय?
एनआईए ने 8 सितंबर को दिल्ली की विशेष अदालत में मैथ्यू एरॉन वान डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ औपचारिक चार्जशीट दाखिल की है। इसमें एजेंसी ने उन पर आव्रजन और विदेशी अधिनियम के तहत आरोप तय किए हैं। हालांकि, चार्जशीट में यूएपीए से जुड़ी धारा गायब है।
मैथ्यू वान डाइक।
- फोटो : अमर उजाला
- आरोपियों ने संरक्षित क्षेत्र मिजोरम में प्रवेश करने के लिए जरूरी प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (पीएपी) हासिल नहीं किए थे।
- आरोपियों ने मिजोरम के जरिए अवैध रूप से म्यांमार की सीमा में प्रवेश किया और म्यांमार में जनजातीय सशस्त्र बलों को ट्रेनिंग दी।
- प्रशिक्षण देने के बाद ये सभी मार्च 2026 में अनधिकृत रास्ते से अवैध रूप से वापस भारत की सीमा में दाखिल हुए।
एनआईए ने कोर्ट में दायर की चार्जशीट।
- फोटो : अमर उजाला
एनआईए के अधिकारियों के मुताबिक, वान डाइक मामले में चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा 8 सितंबर 2026 तक की ही थी। इसलिए मामले में शुरुआती जांच के बाद आव्रजन और विदेशी अधिनियम के तहत आरोपों वाली चार्जशीट दाखिल कर दी गई। इसके साथ ही यूएपीए की धाराओं में लगे आरोपों की जांच जारी है।
एनआईए का कहना है कि बीएनएस (आपराधिक केस) की धारा में जांच से यह पता चलेगा कि इन विदेशी नागरिकों की गतिविधियां भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा पहुंचाने या आतंकवादी साजिश का हिस्सा थीं या नहीं। यानी एजेंसी ने यूएपीए लगाने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया है, हालांकि इसके लिए जांच पर जोर दिया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मोदी सरकार और एनआईए पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या एनआईए ने पूरी और निष्पक्ष जांच के बाद यूएपीए के आरोप हटाए हैं या फिर मोदी सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों के इशारे और दबाव में आकर तुरंत ऐसा किया है? विपक्षी दल ने सरकार से तीखा सवाल किया कि अमेरिकी नागरिक को दी गई इस कानूनी रियायत के बदले भारत सरकार अमेरिका से किस तरह के लाभ या सौदेबाजी की उम्मीद कर रही है।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को कूटनीतिक दबाव और धौंस करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मामले में ढील दे रही है।
एनआईए का कहना है कि बीएनएस (आपराधिक केस) की धारा में जांच से यह पता चलेगा कि इन विदेशी नागरिकों की गतिविधियां भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा पहुंचाने या आतंकवादी साजिश का हिस्सा थीं या नहीं। यानी एजेंसी ने यूएपीए लगाने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया है, हालांकि इसके लिए जांच पर जोर दिया है।
वान डाइक से यूएपीए हटने पर भारत में कैसे उठा सियासी तूफान?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मोदी सरकार और एनआईए पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या एनआईए ने पूरी और निष्पक्ष जांच के बाद यूएपीए के आरोप हटाए हैं या फिर मोदी सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों के इशारे और दबाव में आकर तुरंत ऐसा किया है? विपक्षी दल ने सरकार से तीखा सवाल किया कि अमेरिकी नागरिक को दी गई इस कानूनी रियायत के बदले भारत सरकार अमेरिका से किस तरह के लाभ या सौदेबाजी की उम्मीद कर रही है।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को कूटनीतिक दबाव और धौंस करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मामले में ढील दे रही है।
मैथ्यू वान डाइक मामले में भारत में सियासी घमासान।
- फोटो : अमर उजाला
दूसरी तरफ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के मुखिया और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मामले में केंद्र सरकार को घेरा। एफआईआर में अभी भी यूएपीए का उल्लेख है, लेकिन आसान निकास की सुविधा के लिए यूएपीए के तहत कोई आरोप दायर नहीं किए गए हैं। केवल आव्रजन और विदेशी अधिनियम के तहत आरोप बाकी हैं।
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