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सुप्रीम कोर्ट अपडेट: कावेरी पानी पर एक बार फिर बढ़ा विवाद, कर्नाटक सरकार करेगी सर्वोच्च न्यायालय का रुख

Wed, 09 Sep 2026 09:43 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 09 Sep 2026 09:43 PM IST
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Supreme Court Update Dispute over Cauvery water flares again Karnataka government to move the Supreme Court.
सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

कावेरी जल विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएगी कर्नाटक सरकार

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कर्नाटक सरकार तमिलनाडु को रोजाना 6,000 क्यूसेक कावेरी पानी छोड़ने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। जल संसाधन मंत्री एन. चलुवरायस्वामी ने बताया कि कानूनी टीम से चर्चा के बाद याचिका दाखिल की जाएगी। कर्नाटक सरकार कावेरी जल विनियमन समिति के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका भी दायर करेगी। मंत्री ने कहा कि राज्य के जलाशयों में पानी का स्तर बेहद गंभीर है और पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल पीने के पानी को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गौरी-गणेश त्योहार के बाद अच्छी बारिश होने से स्थिति कुछ सुधर सकती है।

EWS मरीजों के इलाज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को फटकार लगाई। यह फटकार ईडब्लूएस मरीजों को इमरजेंसी मेडिकल केयर देने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने के मामले में कोर्ट की ओर से जारी अवमानना नोटिस का जवाब न देने पर लगाई गई। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने हॉस्पिटल से दो हफ़्ते में जवाब मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि हॉस्पिटल ने अपने हलफनामे में कहा था कि उसे इसमें शामिल होने के लिए कोई नोटिस नहीं मिला था। बेंच ने कहा, 'यह बयान 2 अप्रैल, 2026 की ऑफिस रिपोर्ट के उलट है, जिसमें साफ तौर पर दर्ज है कि नोटिस भेजा जा चुका था। इसलिए, जवाब में दिया गया बयान पहली नजर में ही झूठा है। इसके आधार पर, हम संबंधित प्रतिवादी के मेडिकल सुपरिटेंडेंट के जरिए उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की औपचारिक कार्यवाही शुरू कर रहे हैं।'

 
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रिटायरमेंट से पहले हटाए गए पूर्व ITS अधिकारी को पेंशन लाभ देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय व्यापार सेवा (ITS) के पूर्व अधिकारी एसएस दास को राहत देते हुए उन्हें सभी रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े लाभ देने का आदेश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार पर 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि अधिकारी ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष देश की सेवा में लगाए थे। ऐसे अधिकारी को ‘डेड वुड’ यानी काम के लायक नहीं बताकर सार्वजनिक हित के नाम पर समय से पहले सेवा से हटाना दुर्भावना और अधिकारों के गलत इस्तेमाल को दिखाता है।

दास का सेवा रिकॉर्ड अच्छा रहा था और उन्हें समय पर पदोन्नति भी मिली थी। उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट भी लगातार अच्छी रही। इसके बावजूद उन्हें सामान्य रिटायरमेंट की उम्र से करीब पांच साल पहले मौलिक नियम 56(j) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। अदालत ने कहा कि महानिदेशक विदेश व्यापार दास को कार्यालय बुलाकर पूरे सम्मान के साथ विदाई दें। इससे पहले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण और दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
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छठी के छात्रों को त्रि-भाषा नीति में छूट पर विचार करे सीबीएसई : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा कि वह इस शैक्षणिक सत्र में कक्षा 6 के छात्रों को तीन-भाषा नीति से छूट देने की संभावना तलाशे। अदालत ने कहा, मौजूदा सत्र में पढ़ रहे छात्रों के लिए व्यावहारिक राहत का रास्ता तलाशना चाहिए। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई 17 सितंबर तक टालते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, इस साल कक्षा 6 पर विचार करें। मेहता ने कहा, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनवाई स्थगित की जाए। हालांकि, उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारी इस सुझाव पर विचार करेंगे।
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