मराठा आरक्षण पर घमासान: 'जरांगे से डर रही महाराष्ट्र सरकार', कांग्रेस नेता बोले- फिर किरकिरी का सता रहा डर
मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में सियासत तेज है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने दावा किया कि सरकार आगे की किरकिरी के डर से मनोज जरांगे से बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल नहीं भेज रही। उन्होंने आरक्षण पर संवैधानिक सीमाओं का भी जिक्र किया। आखिर सरकार क्यों पीछे हट रही है? आइए, सबकुछ जानते हैं...
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कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार पर मनोज जरांगे से बातचीत से बचने का आरोप लगाया। नागपुर में उन्होंने कहा कि सरकार प्रतिनिधिमंडल को जरांगे से मिलने के लिए नहीं भेजना चाहती, क्योंकि उसे आगे और किरकिरी होने का डर है। वडेट्टीवार ने दावा किया कि सरकार पहले कई बार जरांगे के सामने झुकी थी। अब वह उनसे मिलने के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने से बच रही है।
मराठा आरक्षण को लेकर वडेट्टीवार ने क्या कहा?
मराठा समुदाय को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिए जाने के सवाल पर वडेट्टीवार ने कहा कि देश का संविधान सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मांग संविधान की सीमा से आगे जाती है, तो उसे स्वीकार करना है या नहीं और संवैधानिक सीमाओं को पार करना है या नहीं, इसका फैसला सरकार को करना है। मनोज जरांगे मराठा समुदाय के आरक्षण से जुड़ी मांगों को लेकर पिछले 11 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
OBC नेता किस बात का विरोध कर रहे हैं?
राज्य में ओबीसी नेताओं का एक वर्ग मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र दिए जाने का विरोध कर रहा है। ऐसे प्रमाणपत्र मिलने पर मराठा समुदाय के लोगों को OBC कोटे के तहत आरक्षण का लाभ मिल सकता है।
अमृता फडणवीस के बयान पर क्या बोले वडेट्टीवार?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस के उस बयान पर भी वडेट्टीवार ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि त्योहार सभी को साथ लेकर चलने वाले होते हैं और किसी मुस्लिम व्यक्ति के समारोह में शामिल होने में कुछ गलत नहीं है। वडेट्टीवार ने उनके रुख का स्वागत किया, लेकिन साथ ही तंज कसते हुए कहा कि उनके बयान का ज्यादा असर तब होगा, जब वह देवेंद्र फडणवीस को नितेश राणे को मंत्रिमंडल से बाहर रखने के लिए मनाएं।
नितेश राणे ने सोमवार को विश्व हिंदू परिषद का समर्थन करते हुए दावा किया था कि ऐसे त्योहारों के दौरान ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि मूर्ति पूजा का पालन नहीं करने वालों को हिंदू धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं होना चाहिए।
महाराष्ट्र में बारिश और किसानों को लेकर क्या बोले?
वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र में बारिश की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य के 19 जिलों में सूखे जैसी स्थिति है। कई तालुकों में 35 से 40 दिनों से बारिश नहीं हुई है और फसलें खतरे में हैं। उन्होंने दावा किया कि परभणी जिले में 44 दिनों से बारिश नहीं हुई है। वडेट्टीवार के मुताबिक, अगले दो से तीन महीनों में राज्य के आधे बांध सूखने की आशंका है। उन्होंने सरकार से किसानों पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की। वडेट्टीवार ने बताया कि कांग्रेस नेता सूखे, आदिवासियों और ओबीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे।