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पश्चिम बंगाल: जादवपुर में भाजपा की ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी हुए शामिल
Wed, 09 Sep 2026 06:40 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Wed, 09 Sep 2026 06:40 PM IST
सार
कोलकाता के जादवपुर में भाजपा ने बुधवार को ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ निकाली, जिसमें शुभेंदु अधिकारी गेरुआ वस्त्र पहनकर शामिल हुए। गोलपार्क से 8बी बस स्टैंड तक निकली यात्रा में साधु-संत और नागा संन्यासी शामिल रहे।
कोलकाता के जादवपुर में भाजपा ने बुधवार को ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ निकाली, जिसमें शुभेंदु अधिकारी गेरुआ वस्त्र पहनकर शामिल हुए। गोलपार्क से 8बी बस स्टैंड तक निकली यात्रा में साधु-संत और नागा संन्यासी शामिल रहे।
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गेरुआ सम्मान यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय में हालिया राजनीतिक टकराव के बीच बुधवार को भाजपा की ओर से गेरुआ सम्मान यात्रा निकाली गई। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद गेरुआ वस्त्र पहनकर यात्रा में शामिल हुए। गोलपार्क से शुरू हुई यात्रा जादवपुर के 8बी बस स्टैंड तक निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में साधु-संत और नागा संन्यासी शामिल हुए। संतों के हाथों में स्वामी विवेकानंद की तस्वीरें और उनके संदेश थे। इस दौरान ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगाए गए।
‘विवेकानंद की धरती पर गेरुआ ही रहेगा’
यात्रा के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने गेरुआ रंग के कथित अपमान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, विवेकानंद की धरती पर गेरुआ ही रहेगा। उन्होंने गेरुआ को त्याग, साधना और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बताया।
‘धर्म की रक्षा के लिए हथियार उठाए’
यात्रा में शामिल एक नागा संन्यासी ने कहा कि गेरुआ वस्त्र का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा, हम अष्टधारी नागा संन्यासी हैं। हमने मुगल काल में धर्म की रक्षा के लिए हथियार उठाए थे। फिर भी हमारे गेरुआ वस्त्र का अपमान क्यों किया जा रहा है। संन्यासी ने कहा कि इस मुद्दे पर बुद्धिजीवियों और राजनीतिक नेताओं की ओर से पर्याप्त विरोध नहीं हुआ। उन्होंने गेरुआ सम्मान यात्रा निकालने की पहल के लिए शुभेंदु अधिकारी की सराहना की। हालांकि, मुगल काल में हथियार उठाने संबंधी उनका दावा उनका व्यक्तिगत कथन है।
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जादवपुर को लेकर भाजपा का संदेश
भाजपा के अनुसार यात्रा का उद्देश्य गेरुआ वस्त्र और हिंदू धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान का संदेश देना है। जादवपुर विश्वविद्यालय में हाल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एसएफआई से जुड़े छात्रों के बीच हुई झड़प के बाद परिसर में राजनीतिक तनाव बना हुआ है। ऐसे समय में विश्वविद्यालय के करीब तक निकाली गई इस यात्रा को भाजपा के सांस्कृतिक और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। यात्रा के मद्देनजर जादवपुर इलाके में पुलिस ने सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की। जादवपुर में वेदपाठ का आयोजन भी किया गया।
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‘विवेकानंद की धरती पर गेरुआ ही रहेगा’
यात्रा के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने गेरुआ रंग के कथित अपमान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, विवेकानंद की धरती पर गेरुआ ही रहेगा। उन्होंने गेरुआ को त्याग, साधना और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बताया।
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‘धर्म की रक्षा के लिए हथियार उठाए’
यात्रा में शामिल एक नागा संन्यासी ने कहा कि गेरुआ वस्त्र का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा, हम अष्टधारी नागा संन्यासी हैं। हमने मुगल काल में धर्म की रक्षा के लिए हथियार उठाए थे। फिर भी हमारे गेरुआ वस्त्र का अपमान क्यों किया जा रहा है। संन्यासी ने कहा कि इस मुद्दे पर बुद्धिजीवियों और राजनीतिक नेताओं की ओर से पर्याप्त विरोध नहीं हुआ। उन्होंने गेरुआ सम्मान यात्रा निकालने की पहल के लिए शुभेंदु अधिकारी की सराहना की। हालांकि, मुगल काल में हथियार उठाने संबंधी उनका दावा उनका व्यक्तिगत कथन है।
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जादवपुर को लेकर भाजपा का संदेश
भाजपा के अनुसार यात्रा का उद्देश्य गेरुआ वस्त्र और हिंदू धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान का संदेश देना है। जादवपुर विश्वविद्यालय में हाल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एसएफआई से जुड़े छात्रों के बीच हुई झड़प के बाद परिसर में राजनीतिक तनाव बना हुआ है। ऐसे समय में विश्वविद्यालय के करीब तक निकाली गई इस यात्रा को भाजपा के सांस्कृतिक और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। यात्रा के मद्देनजर जादवपुर इलाके में पुलिस ने सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की। जादवपुर में वेदपाठ का आयोजन भी किया गया।