{"_id":"694bdd84c42345ee6a02d9a9","slug":"west-bengal-governor-cv-ananda-bose-jadavpur-university-violence-and-corruption-statement-law-and-order-2025-12-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"West Bengal: 'हिंसा-भ्रष्टाचार की दोहरी चुनौती से जूझ रहा बंगाल'; जादवपुर विश्वविद्यालय में बोले राज्यपाल बोस","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
West Bengal: 'हिंसा-भ्रष्टाचार की दोहरी चुनौती से जूझ रहा बंगाल'; जादवपुर विश्वविद्यालय में बोले राज्यपाल बोस
Wed, 24 Dec 2025 08:42 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 24 Dec 2025 08:42 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा है कि राज्य वर्तमान में हिंसा और भ्रष्टाचार की दोहरी समस्या से जूझ रहा है। जादवपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्होंने शैक्षणिक परिसरों को अवांछित तत्वों से मुक्त रखने और सुरक्षित, स्वतंत्र अकादमिक माहौल सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जानिए पूरा मामला
विज्ञापन
सीवी आनंद बोस
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने बुधवार को राज्य की कानून-व्यवस्था और शैक्षणिक माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में बंगाल 'हिंसा' और 'भ्रष्टाचार' की दोहरी चुनौतियों से जूझ रहा है। जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) के 68वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में शिरकत करने पहुंचे राज्यपाल ने कहा 'शिक्षण संस्थानों को इन बुराइयों और अवांछित तत्वों से मुक्त किया जाना चाहिए।'
ये भी पढ़ें: Bengal Polls: TMC के बागी- कबीर ने पूर्व पुलिसकर्मी अबुल हसन को बनाया उम्मीदवार, JUP ने क्यों बदला प्रत्याशी?
राज्यपाल बोस ने क्या कहा?
समारोह से इतर पत्रकारों से बात करते हुए बोस ने कहा कि यह प्रमुख संस्थान अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता और होनहार छात्रों के लिए देश का गौरव है, लेकिन उन्होंने कैंपस को 'अवांछित तत्वों' से मुक्त रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल अब दो समस्याओं 'हिंसा और भ्रष्टाचार' का सामना कर रहा है, जिन्हें हल करने की आवश्यकता है। हमें एक सुरक्षित और स्वतंत्र शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना होगा और कैंपस को हिंसा के खतरे से मुक्त करना होगा।
विज्ञापन
राज्यपाल ने सुझाव को दोहराया
विश्वविद्यालय परिसर में पिछले दो वर्षों में हुई छात्रों की अप्राकृतिक मौतों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सुरक्षित शैक्षणिक माहौल के लिए कैंपस में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह बंद होना चाहिए। उन्होंने संस्थान की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने के लिए इसरो की मदद लेने के अपने पुराने सुझाव को भी दोहराया। हालांकि, कैंपस में स्थायी पुलिस चौकी के सवाल पर उन्होंने बोस ने कहा कि ऐसे मामलों का फैसला राज्य सरकार को करना है।
राष्ट्रपति के फैसले पर क्या बोले राज्यपाल?
राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच जारी 'कुलाधिपति' विवाद पर बोस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उस विधेयक को मंजूरी नहीं दी है, जिसमें राज्यपाल के बजाय मुख्यमंत्री को विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति बनाने का प्रस्ताव था। उन्होंने कहा 'यह हर जगह हर राज्य में लागू होता है। राष्ट्रपति के फैसले ने इन स्थापित मानदंडों की पुष्टि की है' बोस ने कहा कि राज्यपाल के वास्तविक कुलाधिपति होने की परंपरा को पहले एस राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया था और मुर्मू के फैसले ने उस सिद्धांत की पुष्टि की है।
राज्य के छह विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की कमी पर राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित नाम वाइस चांसलर बनने के योग्य नहीं थे, इसलिए उन पर सहमति नहीं बन सकी। पिछले दो वर्षों से दीक्षांत समारोह में अपनी अनुपस्थिति पर उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पूर्णकालिक कुलपति के ऐसे समारोहों की कोई वैधानिक वैधता नहीं होती, लेकिन अब पूर्णकालिक वीसी के तहत विश्वविद्यालय सही दिशा में बढ़ रहा है।
छात्रों ने विरोध कर रखी मांगें
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के सदस्यों द्वारा दीक्षांत समारोह स्थल के बाहर तुरंत छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शनों पर, बोस ने कहा कि उन्हें अपनी मांगें उठाने का अधिकार है। प्रदर्शनकारियों ने तुरंत छात्र चुनाव कराने और इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी में छात्रों को प्रतिनिधित्व देने की मांग की।
ये भी पढ़ें: West Bengal: हुमायूं कबीर का यू-टर्न, 24 घंटे में ही बालीगंज से उम्मीदवार को दिखाया बाहर का रास्ता; जानिए वजह
राज्यपाल ने प्रदर्शनकारी छात्रों से की मुलाकात
इस दौरान राज्यपाल ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनका मांग पत्र स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है और वे इन मांगों का अध्ययन कर सरकार के समक्ष उठाएंगे। एसएफआई के पदाधिकारियों ने राज्यपाल के इस व्यवहार पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वे खुश हैं कि राज्यपाल ने उनकी बात सुनी और सरकार के सामने उनकी मांगें रखने का वादा किया। उन्होंने कहा, 'छात्रों को अपनी मांगों के बारे में बोलने का पूरा अधिकार है। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सरकार को विचार करना चाहिए' और कहा कि वह प्रदर्शनकारियों द्वारा उन्हें सौंपे गए मांगों के चार्टर का अध्ययन करेंगे।
अन्य वीडियो-
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Bengal Polls: TMC के बागी- कबीर ने पूर्व पुलिसकर्मी अबुल हसन को बनाया उम्मीदवार, JUP ने क्यों बदला प्रत्याशी?
विज्ञापन
राज्यपाल बोस ने क्या कहा?
समारोह से इतर पत्रकारों से बात करते हुए बोस ने कहा कि यह प्रमुख संस्थान अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता और होनहार छात्रों के लिए देश का गौरव है, लेकिन उन्होंने कैंपस को 'अवांछित तत्वों' से मुक्त रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल अब दो समस्याओं 'हिंसा और भ्रष्टाचार' का सामना कर रहा है, जिन्हें हल करने की आवश्यकता है। हमें एक सुरक्षित और स्वतंत्र शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना होगा और कैंपस को हिंसा के खतरे से मुक्त करना होगा।
विज्ञापन
राज्यपाल ने सुझाव को दोहराया
विश्वविद्यालय परिसर में पिछले दो वर्षों में हुई छात्रों की अप्राकृतिक मौतों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सुरक्षित शैक्षणिक माहौल के लिए कैंपस में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह बंद होना चाहिए। उन्होंने संस्थान की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने के लिए इसरो की मदद लेने के अपने पुराने सुझाव को भी दोहराया। हालांकि, कैंपस में स्थायी पुलिस चौकी के सवाल पर उन्होंने बोस ने कहा कि ऐसे मामलों का फैसला राज्य सरकार को करना है।
राष्ट्रपति के फैसले पर क्या बोले राज्यपाल?
राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच जारी 'कुलाधिपति' विवाद पर बोस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उस विधेयक को मंजूरी नहीं दी है, जिसमें राज्यपाल के बजाय मुख्यमंत्री को विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति बनाने का प्रस्ताव था। उन्होंने कहा 'यह हर जगह हर राज्य में लागू होता है। राष्ट्रपति के फैसले ने इन स्थापित मानदंडों की पुष्टि की है' बोस ने कहा कि राज्यपाल के वास्तविक कुलाधिपति होने की परंपरा को पहले एस राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया था और मुर्मू के फैसले ने उस सिद्धांत की पुष्टि की है।
राज्य के छह विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की कमी पर राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित नाम वाइस चांसलर बनने के योग्य नहीं थे, इसलिए उन पर सहमति नहीं बन सकी। पिछले दो वर्षों से दीक्षांत समारोह में अपनी अनुपस्थिति पर उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पूर्णकालिक कुलपति के ऐसे समारोहों की कोई वैधानिक वैधता नहीं होती, लेकिन अब पूर्णकालिक वीसी के तहत विश्वविद्यालय सही दिशा में बढ़ रहा है।
छात्रों ने विरोध कर रखी मांगें
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के सदस्यों द्वारा दीक्षांत समारोह स्थल के बाहर तुरंत छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शनों पर, बोस ने कहा कि उन्हें अपनी मांगें उठाने का अधिकार है। प्रदर्शनकारियों ने तुरंत छात्र चुनाव कराने और इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी में छात्रों को प्रतिनिधित्व देने की मांग की।
ये भी पढ़ें: West Bengal: हुमायूं कबीर का यू-टर्न, 24 घंटे में ही बालीगंज से उम्मीदवार को दिखाया बाहर का रास्ता; जानिए वजह
राज्यपाल ने प्रदर्शनकारी छात्रों से की मुलाकात
इस दौरान राज्यपाल ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनका मांग पत्र स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है और वे इन मांगों का अध्ययन कर सरकार के समक्ष उठाएंगे। एसएफआई के पदाधिकारियों ने राज्यपाल के इस व्यवहार पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वे खुश हैं कि राज्यपाल ने उनकी बात सुनी और सरकार के सामने उनकी मांगें रखने का वादा किया। उन्होंने कहा, 'छात्रों को अपनी मांगों के बारे में बोलने का पूरा अधिकार है। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सरकार को विचार करना चाहिए' और कहा कि वह प्रदर्शनकारियों द्वारा उन्हें सौंपे गए मांगों के चार्टर का अध्ययन करेंगे।
अन्य वीडियो-