फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Maratha vs OBC Reservation battle intensifies Bhujbal and Jarange face off over reservation issue trade barbs

मराठा बनाम ओबीसी की लड़ाई तेज: आरक्षण के मुद्दे पर आमने-सामने भुजबल और जारांगे; एक-दूसरे पर साधा निशाना

Fri, 04 Sep 2026 07:07 PM IST
प्रशांत तिवारी आईएएनएस, मुंबई
आईएएनएस, मुंबई Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 04 Sep 2026 07:07 PM IST
सार

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण और ओबीसी कोटे को लेकर सत्तारूढ़ महायुति के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। मंत्री छगन भुजबल ने ओबीसी आरक्षण के हितों की अनदेखी होने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है, जबकि मनोज जारांगे पाटिल ने उन पर ओबीसी राजनीति के जरिए राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है।

विज्ञापन
Maratha vs OBC Reservation battle intensifies Bhujbal and Jarange face off over reservation issue trade barbs
मनोज जरांगे और छगन भुजबल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

महाराष्ट्र में आरक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान शुक्रवार को और तेज हो गई। वरिष्ठ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता और महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने अपनी ही महायुति सरकार को अन्य पिछड़ा वर्ग के कोटे में किसी भी तरह के हस्तक्षेप के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी। उनके इस तीखे बयान पर मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जारांगे पाटिल ने भी तत्काल और जोरदार पलटवार किया। दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर चल रहे मतभेदों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

विज्ञापन


भुजबल ने सरकार पर साधा निशाना
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मंत्री छगन भुजबल ने अंतरवाली सराटी में मनोज जारांगे पाटिल के भूख हड़ताल स्थल का दौरा करने वाले राज्य के मंत्रियों और विधायकों पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जारांगे पाटिल की मांगों को पूरा करने में जरूरत से ज्यादा जल्दबाजी दिखा रही है। भुजबल ने कुनबी-मराठा का दर्जा हासिल करने के लिए कथित तौर पर दस्तावेजों में हेरफेर किए जाने पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर किसी को भी जाति प्रमाण पत्र देने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जाति जांच समिति एक महत्वपूर्ण संस्था है और किसी को भी उस पर दबाव नहीं डालना चाहिए। भुजबल ने उन विधायकों पर भी सवाल उठाया, जिन्होंने खारिज किए जा चुके जाति प्रमाण पत्रों को 'ठीक' कराने का वादा किया था।
विज्ञापन


जाति प्रमाण पत्रों को लेकर उठाए सवाल
भुजबल ने कहा,'मुंबई में चार पार्षदों की सीटें इसलिए चली गईं, क्योंकि उनके जाति वैधता प्रमाण पत्र रद्द कर दिए गए थे। क्या आप उनके प्रमाण पत्र भी 'ठीक' करने जा रहे हैं?' जाति प्रमाण पत्र और उनकी वैधता से जुड़े मामलों में नियमों और तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी भी समुदाय के दबाव में आकर संस्थागत प्रक्रिया को कमजोर करना उचित नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


मराठा और ओबीसी कल्याण के लिए आवंटन पर भुजबल नाराज
आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए भुजबल ने बताया कि उन्होंने कैबिनेट उप-समिति की बैठक से विरोध स्वरूप वॉकआउट किया था। उनका विरोध उस समय सामने आया, जब मराठा-केंद्रित अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक विकास निगम के लिए 750 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जबकि ओबीसी कल्याण समितियों को महज 5 करोड़ रुपये दिए गए। भुजबल ने सवाल उठाया कि अगर सरकार मराठा समुदाय के लिए अलग व्यवस्था या विशेष मंत्रालय बनाने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो फिर राज्य के प्रत्येक समुदाय के लिए अलग-अलग मंत्रालय बनाए जाने चाहिए।

OBC, SEBC और EWS को लेकर सरकार से मांगा जवाब
भुजबल ने राज्य सरकार से तत्काल यह स्पष्ट करने की मांग की कि एक ही उम्मीदवार एक साथ तीन अलग-अलग श्रेणियों ओबीसी, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के तहत लाभ कैसे ले सकता है। आरक्षण की विभिन्न श्रेणियों के बीच नियमों और पात्रता को लेकर स्पष्टता जरूरी है, ताकि किसी भी वर्ग के अधिकारों पर असर न पड़े और व्यवस्था को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

मराठा आरक्षण कैबिनेट उप-समिति के अधिकारों पर भी सवाल
भुजबल ने मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की अध्यक्षता वाली मराठा आरक्षण कैबिनेट उप-समिति पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह समिति स्थानीय स्तर पर निर्देश जारी करने और सरकारी आदेश एकतरफा जारी करने का अधिकार रखती है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर ओबीसी समुदाय के हितों की लगातार अनदेखी की गई, तो वह चुप नहीं बैठेंगे और जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

जारांगे पाटिल का भुजबल पर तीखा पलटवार
अंतरवाली सराटी में अपने विरोध स्थल से प्रतिक्रिया देते हुए मनोज जारांगे पाटिल ने भुजबल पर तीखा व्यक्तिगत हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भुजबल राजनीतिक फायदे के लिए ओबीसी समुदाय के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस उम्र में उन्हें (छगन भुजबल) अपनी राजनीति पर ध्यान देना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि अपने भतीजे को सांसद कैसे बनाया जाए। पाटिल ने आगे कहा,'उन्होंने (छगन भुजबल) ओबीसी के नाम पर सब कुछ हड़प लिया। ओबीसी विकास निगम को खाली कर दिया गया और महाराष्ट्र सदन को भी नहीं बख्शा गया।  ओबीसी समुदाय अब उनके असली चरित्र को पहचान गया है, क्योंकि उनका पतन शुरू हो गया है। 

ओबीसी आबादी के आंकड़े पर भी जारांगे ने उठाए सवाल
भुजबल के OBC आबादी से जुड़े दावों को खारिज करते हुए जारांगे पाटिल ने कहा,'भुजबल को किसने बताया कि OBC आबादी 60 प्रतिशत है? विशाल मराठा समुदाय को केवल 10 प्रतिशत कोटा दिया गया है।' आरक्षण के मुद्दे पर अलग-अलग समय में अलग-अलग राजनीतिक रुख अपनाए जा रहे हैं और इसका सीधा असर समुदायों के बीच चल रही बहस पर पड़ रहा है।

'मौके के हिसाब से पाला बदलते हैं'
जारांगे पाटिल ने भुजबल की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'लोग देख रहे हैं कि कैसे वह (छगन भुजबल) मौके के हिसाब से पाला बदलते रहते हैं कभी महा विकास अघाड़ी में शामिल हो जाते हैं, कभी महायुति में और कभी अजित पवार के साथ हो जाते हैं।' 


ये भी पढ़ें: दिल्ली एनसीआर में बरसे बदरा: खराब मौसम से नौ उड़ानें डायवर्ट, आईजीआई एयरपोर्ट पर भरा पानी

मांगें मानने के बावजूद अनशन खत्म करने से इनकार
जारांगे पाटिल ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने उनकी प्रमुख मांगों को मानने की बात कही है। इनमें ऐतिहासिक रिकॉर्ड वाले लोगों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करना भी शामिल है। हालांकि, जारांगे ने साफ कर दिया कि केवल आश्वासन के आधार पर वह अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जब तक सरकार इन मांगों को जमीनी स्तर पर आधिकारिक रूप से लागू नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed