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शिक्षक नियुक्ति विवाद: ममता के दो मंत्रियों पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, पार्थ चटर्जी से साढ़े तीन घंटे सीबीआई पूछताछ

Wed, 18 May 2022 10:03 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Amit Mandal Updated Wed, 18 May 2022 10:03 PM IST
सार

एकल पीठ ने इन नियुक्तियों में हुई धांधली की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने दो जजों की खंडपीठ में याचिका दायर की थी।  
 

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Teacher appointment: Mamta Banerjee two ministers did not get relief from the High Court
पार्थ चटर्जी से पूछताछ - फोटो : ANI

विस्तार

प. बंगाल के स्कूल सेवा आयोग के माध्यम से ग्रुप डी, ग्रुप सी और कक्षा नौ और 10 के शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर जारी विवाद के बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला सुनाया। ममता सरकार को दो बड़े मंत्री इस मामले में बुरी तरह से फंस गए हैं। हाई कोर्ट ने दोनों मंत्री पार्थ चटर्जी और परेश अधिकारी को सीबीआई के समक्ष हाजिर होने का निर्देश दिया है। अब दोनों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। सीबीआई के समक्ष हाजिर होने से बचने के लिए दोनों मंत्री हाई कोर्ट की खंडपीठ भी गए लेकिन बुधवार को राहत नहीं मिली। इसके बाद पार्थ चटर्जी सीबीआई मुख्यालय पहुंचे जहां उनसे साढ़े तीन घंटे पूछताछ हुई।

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एकल पीठ का फैसला सही करार दिया 
जस्टिस सुब्रत तालुकदार और जस्टिस एके मुखर्जी की खंडपीठ ने स्कूल सेवा आयोग की 2016 के पैनल में शिक्षण, गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति में अनियमितताओं को सार्वजनिक घोटाला करार दिया है। खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ के जज अभिजीत गांगुली का फैसला गलत नहीं है और उनके आदेशों में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। एकल पीठ ने इन नियुक्तियों में हुई धांधली की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने दो जजों की खंडपीठ में याचिका दायर की थी।  
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खंडपीठ ने बाग कमेटी की रिपोर्ट को भी मंजूरी दे दी है। साथ ही कहा कि विवादास्पद रूप से नियोजित लोगों के वेतन में कटौती या वापसी का निर्णय लेने में कुछ भी गलत नहीं है। फैसला आने के तुरंत बाद एकल पीठ के न्यायाधीश अभिजीत गांगुली ने वर्तमान में उद्योग व संसदीय कार्यमंत्री व पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को एसएससी भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई के समक्ष शाम छह बजे तक पेश होने का निर्देश जारी कर दिया।


पूछताछ में हाजिर नहीं होने पर गिरफ्तारी का आदेश 
न्यायाधीश गांगुली ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि अगर वे शाम छह बजे तक पूछताछ के लिए हाजिर नहीं होते हैं, तो उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जाए। इसके साथ ही न्यायाधीश ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व राज्यपाल जगदीप धनखड़ से पार्थ चटर्जी को मंत्री पद से तत्काल हटाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह कोई निर्देश नहीं है, लेकिन मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी व स्वतंत्र जांच के लिए ऐसा करना सही होगा। जज गांगुली ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पार्थ मंत्री पद छोड़ देंगे।

पार्थ चटर्जी ने एकल पीठ के निर्देश को चुनौती देते हुए एक बार फिर न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायाधीश रवींद्रनाथ सामंत की खंडपीठ में अपील की। इस पर खंडपीठ ने कहा कि नियमानुसार अपील नहीं हुई है, इसीलिए वे इस तरह मामले को नहीं सुन सकते हैं। इसके बाद पार्थ की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई। 

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