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Supreme Court: शीर्ष अदालत का फैसला, समझौते से जघन्य अपराधों की एफआईआर रद्द नहीं हो सकती
Fri, 29 Jul 2022 10:57 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 29 Jul 2022 10:57 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि धारा 480 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करने से पहले हाईकोर्ट को अपराध की प्रकृति और गंभीरता के प्रति चौकस रहने की जरूरत है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसला देते हुए कहा कि समाज पर गंभीर प्रभाव डालने वाले जघन्य अपराध में पीड़ित, अपराधी या शिकायतकर्ता के बीच समझौते के आधार पर एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर ऐसा किया गया तो एक खतरनाक मिसाल स्थापित होगी और लोग सिर्फ आरोपी से पैसे ऐंठने के लिए शिकायतें दर्ज कराएंगे।
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जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने कहा कि यही नहीं, ऐसे तो दुष्कर्म, हत्या, दहेज उत्पीड़न जैसे गुनाह करने के बाद आर्थिक रूप से मजबूत आरोपी पैसे देकर समझौता कर लेंगे और कानून से बच जाएंगे। पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेशों को खारिज कर दिया। इनमें एक आदेश वह भी शामिल है जिसमें आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मार्च 2020 में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि धारा 480 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करने से पहले हाईकोर्ट को अपराध की प्रकृति और गंभीरता के प्रति चौकस रहने की जरूरत है।
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