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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की एमसीडी को फटकार, चांदनी चौक में घर और व्यावसायिक संपत्तियां गिराने पर लगाई रोक

Tue, 13 May 2025 09:26 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 13 May 2025 09:26 PM IST
सार

शीर्ष अदालत में दायर याचिका में दावा किया गया था कि कथित तौर पर नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से क्षेत्र में अवैध निर्माण कार्य चल रहा है। इस पीठ ने कहा कि हम साइट का स्वतंत्र निरीक्षण चाहते हैं क्योंकि हम एमसीडी अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं कर सकते।

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Supreme Court reprimands MCD, bans demolition of houses and commercial properties in Chandni Chowk
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजधानी के चांदी चौक के फतेहपुरी इलाके में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों को गिराने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने एमसीडी को फटकार भी लगाई।
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न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एक हस्तक्षेपकर्ता की ओर से दायर क्षेत्र की तस्वीरों की जांच की और वाणिज्यिक परिसरों के निर्माण को रोकने में असमर्थ होने की बात कहने पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को फटकार लगाई।  साथ ही एमसीडी को सभी विवरणों के साथ स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया। साथ ही उन्हें अवमानना कार्रवाई या यह निष्कर्ष निकालने की चेतावनी दी कि वे बिल्डरों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं। पीठ ने आदेश दिया कि तब तक आवासीय भवनों के ध्वस्तीकरण और वाणिज्यिक परिसरों के निर्माण और रूपांतरण पर रोक लगाई जाती है।
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कोर्ट में एमसीडी के वकील ने कहा कि अदालत के आदेश के अनुपालन में एक टीम ने क्षेत्र का दौरा किया और पूरे परिसर तथा आस-पास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की। छुट्टियों के कारण रिपोर्ट रिकॉर्ड में नहीं रखी जा सकी तथा उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी अवैध निर्माण हटा दिए गए हैं।
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शीर्ष अदालत में दायर याचिका में दावा किया गया था कि कथित तौर पर नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से क्षेत्र में अवैध निर्माण कार्य चल रहा है। इस पर पीठ ने उनसे कुछ स्वतंत्र वास्तुकारों और सिविल इंजीनियरों के नाम सुझाने को कहा, जो निरीक्षण के लिए साइट पर जा सकें और अदालत को रिपोर्ट सौंप सकें। पीठ ने कहा कि हम साइट का स्वतंत्र निरीक्षण चाहते हैं क्योंकि हम एमसीडी अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं कर सकते। इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 23 मई तय की।


17 फरवरी को शीर्ष अदालत ने दिल्ली के व्यस्त चांदनी चौक इलाके में कथित अवैध निर्माण और इसे रोकने में एमसीडी की विफलता की सीबीआई जांच का आदेश देने पर विचार किया था। कोर्ट ने चिंता व्यक्त की और शहर के वाणिज्यिक केंद्र में अनधिकृत निर्माणों की जांच करने में एमसीडी के अधिकारियों की अनदेखी को दोषी ठहराया।

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इस पर एमसीडी ने दावा किया कि कथित अनधिकृत निर्माण को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार हटाया गया, जहां मामला अभी भी लंबित है। याचिकाकर्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय के दो आदेशों को चुनौती दी थी, जिसमें चांदनी चौक के फतेहपुरी स्थित बाग दीवार में अनधिकृत निर्माण को हटाने से संबंधित आदेश भी शामिल था, जिसे एमसीडी के आश्वासन पर निपटा दिया गया था।

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