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Senior Designation: सुप्रीम कोर्ट ने खत्म की वकीलों की अंक-आधारित मूल्यांकन प्रणाली, जारी किए नए दिशानिर्देश

Tue, 13 May 2025 06:27 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 13 May 2025 06:27 PM IST
सार

Senior Designation: सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील का दर्जा देने की पुरानी अंक-आधारित प्रणाली को खत्म कर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनके मुताबिक, अब सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ वरिष्ठ वकील की नियुक्ति तय होगी। न्यूनतम 10 साल की वकालत का अनुभव जरूरी होगा, लेकिन अब इंटरव्यू जैसे मूल्यांकन नहीं होंगे।

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Senior designation: SC removes point-based assessment of lawyers
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वकीलों को 'वरिष्ठ वकील' का दर्जा देने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं और अब तक चली आ रही अंक-आधारित मूल्यांकन प्रणाली को खत्म कर दिया है। जस्टिस अभय एस. ओका, उज्जल भुयां और एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने कहा कि पिछले साढ़े सात वर्षों का अनुभव यह दिखाता है कि अंकों के आधार पर वकीलों की योग्यता और अनुभव का मूल्यांकन तर्कसंगत और वस्तुनिष्ठ तरीके से करना संभव नहीं है।

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कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वे अपने नियमों में चार महीने के अंदर बदलाव करें और उन्हें नए दिशानिर्देश के अनुसार बनाएं। शीर्ष कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें-

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  • अब से वरिष्ठ वकील की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की पूर्ण कोर्ट से तय होगी।
  • आवेदन करने वाले सभी पात्र उम्मीदवारों की जानकारी स्थायी सचिवालय द्वारा एकत्र की जाएगी और पूर्ण कोर्ट के सामने रखी जाएगी।
  • अगर पूर्ण कोर्ट में सर्वसम्मति नहीं बनती, तो गोपनीय मतदान के माध्यम से निर्णय लिया जा सकता है।
  • वरिष्ठ वकील के लिए वकालत का न्यूनतम 10 साल का अनुभव जरूरी रहेगा।

साल में एक बार होनी चाहिए प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा, वकीलों द्वारा आवेदन देने की प्रक्रिया जारी रहेगी और अगर कोई योग्य उम्मीदवार हो, तो बिना आवेदन के भी उसे वरिष्ठ दर्जा दिया जा सकता है। किसी जज को व्यक्तिगत रूप से किसी का नाम प्रस्तावित करने का अधिकार नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि हर साल कम से कम एक बार यह प्रक्रिया होनी चाहिए। जब तक सभी हाई कोर्ट अपने नियम नहीं बदलते, नई प्रक्रिया लागू नहीं की जाएगी और नए आवेदन नहीं लिए जाएंगे।

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सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में दिया था अंक-आधारित मूल्यांकन प्रणाली का फैसला
2017 में सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह की याचिका पर फैसला देते हुए एक स्थायी समिति बनाने और अंक प्रणाली के तहत मूल्यांकन के दिशानिर्देश तय किए थे। उस प्रणाली में 25 नंबर इंटरव्यू के लिए रखे गए थे, जिस पर काफी विवाद हुआ। अब शीर्ष कोर्ट ने माना है कि कुछ मिनटों के इंटरव्यू से किसी वकील की योग्यता को सही तरीके से परखा नहीं जा सकता।

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