फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Dismisses PIL Seeking Fraud-Proof Verification of Medical Degrees and Registrations

सुप्रीम कोर्ट: फर्जी मेडिकल डिग्री पर रोक की जनहित याचिका खारिज, याचिकाकर्ता से बोले- हर हफ्ते PIL क्यों?

Wed, 16 Sep 2026 10:18 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 16 Sep 2026 10:18 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल डिग्री और रजिस्ट्रेशन के फर्जीवाड़े पर रोक के लिए एक समान सत्यापन व्यवस्था की मांग वाली पीआईएल खारिज कर दी। पीठ ने याचिकाकर्ता के बार-बार जनहित याचिकाएं दाखिल करने पर भी नाराजगी जताई।

विज्ञापन
Supreme Court Dismisses PIL Seeking Fraud-Proof Verification of Medical Degrees and Registrations
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

देशभर में मेडिकल डिग्री और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन की फर्जीवाड़ा-रोधी जांच व्यवस्था लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की याचिका खारिज कर दी। पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा बार-बार PIL दाखिल करने पर भी नाराजगी जताई।

विज्ञापन


हर हफ्ते PIL दाखिल करने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता लगभग हर सप्ताह एक PIL दाखिल करते हैं। जस्टिस नरसिम्हा की अगुवाई वाली पीठ ने सवाल किया कि इस तरह की याचिकाएं किस तरह तैयार की जाती हैं और क्या इन्हें दाखिल करने से पहले उनके मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाता है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसी याचिकाएं सिर्फ प्रचार पाने के लिए दाखिल की जा रही हैं। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि इस तरह नियमित रूप से याचिकाओं का बोझ अदालत पर न डाला जाए।
विज्ञापन


क्या मांग की गई थी?
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह PIL दाखिल की थी। इसमें देशभर में मेडिकल डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन के सत्यापन के लिए एक ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की गई थी, जो भरोसेमंद, ऑडिट योग्य और फर्जीवाड़े से सुरक्षित हो।
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिका में कहा गया था कि मेडिकल पेशे में किसी व्यक्ति की योग्यता और रजिस्ट्रेशन की सही जांच जरूरी है। इसके लिए शुरुआती रजिस्ट्रेशन, रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण, नई शैक्षणिक योग्यता जोड़ने और प्रैक्टिस का लाइसेंस जारी रखने से पहले भी सत्यापन की व्यवस्था बनाने की मांग की गई थी।

मरीजों के सुरक्षित इलाज से जोड़ा था मामला
पीआईएल में तर्क दिया गया था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में सुरक्षित और सक्षम चिकित्सा सुविधा पाने का अधिकार भी शामिल है। याचिका के मुताबिक फर्जी, संदिग्ध या बिना सत्यापन वाली योग्यता रखने वाले लोगों को मेडिकल पेशे में प्रवेश या उसमें बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता ने नेशनल मेडिकल रजिस्टर को केवल इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस नहीं, बल्कि ऐसी वैधानिक व्यवस्था बताया था जिस पर मरीज, अस्पताल और सरकारी संस्थाएं डॉक्टर की योग्यता और रजिस्ट्रेशन की पुष्टि के लिए निर्भर करते हैं।

फर्जी डिग्री के कई मामलों का दिया हवाला
याचिका में देश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आए कथित फर्जी डिग्री और पेशेवर योग्यता से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया था। इसमें मई 2025 में उत्तर प्रदेश एसटीएफ की हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी में कथित कार्रवाई का हवाला दिया गया था, जहां 1,372 फर्जी डिग्री/मार्कशीट और 262 कथित फर्जी प्रमाणपत्र बरामद होने की बात कही गई थी।

इसके अलावा केरल पुलिस की ओर से जांच किए गए कथित फर्जी प्रमाणपत्र नेटवर्क, दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच की कथित फर्जी फार्मेसी रजिस्ट्रेशन जांच और मार्च 2026 में राजस्थान पुलिस एसओजी द्वारा जांचे गए कथित फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन प्रमाणपत्र एवं मेडिकल रजिस्ट्रेशन मामले का भी उल्लेख किया गया था। याचिका में स्पष्ट किया गया था कि इन मामलों के जरिए किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय करने की मांग नहीं की जा रही है। इनका उल्लेख केवल मेडिकल रजिस्ट्रेशन व्यवस्था में बेहतर सुरक्षा उपायों की जरूरत बताने के लिए किया गया था।

स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC को भी दिया था ज्ञापन
याचिकाकर्ता के मुताबिक उन्होंने 26 फरवरी 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को मेडिकल डिग्री और रजिस्ट्रेशन के सत्यापन से जुड़े कदम उठाने के लिए ज्ञापन दिया था। इसके बाद 31 मई 2026 को रिमाइंडर भी भेजा गया। याचिका में दावा किया गया कि इन पत्रों का जवाब नहीं मिला। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।


व्यक्तिगत डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं थी
पीआईएल में किसी खास डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन रद्द करने, आपराधिक जांच की निगरानी करने या मेडिकल लापरवाही के मामलों का फैसला करने की मांग नहीं की गई थी। याचिका में एक ऐसी संरचनात्मक और निवारक व्यवस्था बनाने की मांग थी, जिसमें किसी भी सत्यापन या कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस और सुनवाई का अवसर मिले तथा कानून के मुताबिक कारण सहित आदेश जारी किया जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed