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SC: 'सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए गंभीरता से लागू करें स्कीम', सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार
Tue, 13 May 2025 04:19 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 13 May 2025 04:19 PM IST
सार
Cashless Treatment For Road Accident Victms: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए ₹1.5 लाख तक के कैशलेस इलाज की योजना को "सही भावना और गंभीरता" के साथ लागू करने का निर्देश दिया है। गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना का कोई भी पीड़ित इस योजना के प्रावधानों के अनुसार कैशलेस इलाज पाने का हकदार होगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
सड़क हादसों में घायलों को ‘गोल्डन ऑवर’ यानी दुर्घटना के बाद पहले एक घंटे में मुफ्त इलाज मुहैया कराने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। मंगलवार को न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए तैयार की गई कैशलेस इलाज योजना को “पूरी गंभीरता और भावना के साथ” लागू किया जाए।
दुर्घटना पीड़ित को मिलेगा ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज
केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से बनाई गई यह योजना 5 मई 2025 से लागू हो चुकी है। इसके तहत किसी भी सड़क पर मोटर वाहन से होने वाले हादसे में घायल व्यक्ति को ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा।
गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना का कोई भी पीड़ित इस योजना के प्रावधानों के अनुसार कैशलेस इलाज पाने का हकदार होगा।
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दुर्घटना पीड़ित को मिलेगा ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज
केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से बनाई गई यह योजना 5 मई 2025 से लागू हो चुकी है। इसके तहत किसी भी सड़क पर मोटर वाहन से होने वाले हादसे में घायल व्यक्ति को ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा।
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गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना का कोई भी पीड़ित इस योजना के प्रावधानों के अनुसार कैशलेस इलाज पाने का हकदार होगा।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
कोर्ट ने लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 28 अप्रैल को केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि 8 जनवरी के आदेश के बावजूद योजना तैयार नहीं की गई और न ही समय बढ़ाने की कोई याचिका दाखिल की गई। न्यायालय ने कहा था, "आप अवमानना की स्थिति में हैं। तीन साल से प्रावधान लागू है, लेकिन योजना अब तक नहीं बनाई गई। क्या आप सच में आम आदमी के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं?"
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मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 2 (12-A) में ‘गोल्डन ऑवर’ को दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा माना गया है, जिसमें समय पर इलाज मिलने से जान बच सकती है। कोर्ट ने केंद्र को जनवरी 8 के आदेश में इस अवधि के दौरान इलाज के लिए योजना तैयार करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 28 अप्रैल को केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि 8 जनवरी के आदेश के बावजूद योजना तैयार नहीं की गई और न ही समय बढ़ाने की कोई याचिका दाखिल की गई। न्यायालय ने कहा था, "आप अवमानना की स्थिति में हैं। तीन साल से प्रावधान लागू है, लेकिन योजना अब तक नहीं बनाई गई। क्या आप सच में आम आदमी के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं?"
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मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 2 (12-A) में ‘गोल्डन ऑवर’ को दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा माना गया है, जिसमें समय पर इलाज मिलने से जान बच सकती है। कोर्ट ने केंद्र को जनवरी 8 के आदेश में इस अवधि के दौरान इलाज के लिए योजना तैयार करने को कहा था।
road accident
- फोटो : amar ujala
योजना में अब भी हैं कुछ खामियां
केंद्र ने योजना के मसौदे में सात दिन तक के इलाज और ₹1.5 लाख की सीमा तय की है, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह गंभीर मामलों में पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने पाया कि हिट एंड रन मामलों में मुआवजा दावों की प्रक्रिया धीमी है। 31 जुलाई 2024 तक 921 ऐसे दावे लंबित थे। कोर्ट ने जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) को दावा प्रक्रिया तेज करने और पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड की सुविधा को बेहतर करने का निर्देश दिया।
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अगस्त तक मांगी गई रिपोर्ट
अदालत ने केंद्र को अगस्त 2025 के अंत तक हलफनामा दाखिल कर योजना के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी देने को कहा है। इसमें केंद्र को स्कीम के तहत इलाज पाने वाले लोगों की संख्या के बारे में जानकारी देनी होगी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 162(2) के अनुसार बीमा कंपनियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे गोल्डन ऑवर में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को इलाज मुहैया कराएं।
केंद्र ने योजना के मसौदे में सात दिन तक के इलाज और ₹1.5 लाख की सीमा तय की है, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह गंभीर मामलों में पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने पाया कि हिट एंड रन मामलों में मुआवजा दावों की प्रक्रिया धीमी है। 31 जुलाई 2024 तक 921 ऐसे दावे लंबित थे। कोर्ट ने जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) को दावा प्रक्रिया तेज करने और पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड की सुविधा को बेहतर करने का निर्देश दिया।
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अगस्त तक मांगी गई रिपोर्ट
अदालत ने केंद्र को अगस्त 2025 के अंत तक हलफनामा दाखिल कर योजना के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी देने को कहा है। इसमें केंद्र को स्कीम के तहत इलाज पाने वाले लोगों की संख्या के बारे में जानकारी देनी होगी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 162(2) के अनुसार बीमा कंपनियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे गोल्डन ऑवर में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को इलाज मुहैया कराएं।