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क्या अब बदलेगा सुधार गृहों का हाल?: खुली जेलों के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जारी किए दिशा-निर्देश; जानिए

Thu, 26 Feb 2026 08:54 PM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Thu, 26 Feb 2026 08:54 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के खुले जेलों की सुधार और सही संचालन को लेकर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को 3 महीने में प्रोटोकॉल और 2 महीने में पात्रता-सुरक्षा के तहत खाली पद भरने को कहा। आइए पूरे मामले को समझते हैं।

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Supreme Court directs states UTs to develop protocol for filling vacancies open prisons ensure dignity inmates
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देशभर के खुले जेलों में सुधार और संचालन के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अहम दिशा-निर्देश दिए। मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशंस (ओसीआई) और ओपन बैरक्स केवल कैदियों को रखने की सुविधा न बनें, बल्कि यह सुधार और पुनर्वास के सार्थक संस्थान बनें। कोर्ट के ये निर्देश जेलों में भीड़भाड़ और खुली सुधार गृहों के कामकाज से संबंधित एक जनहित याचिका पर आया है।

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बता दें कि ओपन या सेमी-ओपन जेलें कैदियों को दिन में बाहर काम करने और शाम को जेल लौटने की अनुमति देती हैं। इसका उद्देश्य कैदियों को समाज में फिर से शामिल करना और उन्हें मानसिक दबाव से राहत देना है। मामले में कोर्ट ने निर्देश दिए कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को तीन महीने में समयबद्ध प्रोटोकॉल तैयार करना होगा, जिससे सभी खाली पदों को भरने की योजना बनाई जा सके। इसके साथ ही कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि पात्रता और सुरक्षा नियमों के अनुसार खाली पदों को भरने का समय दो महीने होगा।
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सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश को समझिए

  • हर प्रोटोकॉल और पदों की पूर्ति की रिपोर्ट एक महीने में निगरानी समिति के पास जमा करनी होगी।
  • महिलाओं के कैदियों के लिए पर्याप्त क्षमता सुनिश्चित करने के लिए ओसीआई का पुनर्गठन करने का निर्देश दिया गया।
  • सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नई ओपन जेलें स्थापित करने और मौजूदा बंद जेलों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक्स बनाने के लिए कदम उठाने होंगे।
  • प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश को तीन महीने में अपनी जेलों की संरचना का मूल्यांकन करना होगा।

जेलें केवल सजा का माध्यम नहीं- पीठ
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि जेलें केवल सजा का माध्यम नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत समानता, गैर-भेदभाव और सम्मान के अधिकार का सम्मान करना जरूरी है। कैदी अपनी संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं होते और उन्हें मानवीय तरीके से व्यवहार किया जाना चाहिए।

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विशेष समिति के गठन का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशंस के सुधार और संचालन के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जिसका कार्यकारी अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश एस रवींद्र भट होंगे। इस समिति का उद्देश्य सभी ओसीआई के संचालन, प्रशासन, पात्रता और रहने की स्थिति के लिए समान न्यूनतम मानक तय करना है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया है कि वे सुवो मोटु याचिका दर्ज करें, ताकि इस आदेश के पालन की प्रभावी निगरानी हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान की मजबूती सजा की कठोरता में नहीं, बल्कि कैदियों की गौरव, आशा और अवसर की बहाली में है।

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