कितने चरण में होंगे तमिलनाडु चुनाव?: CEC कुमार के साथ विभिन्न दलों की बैठक, पार्टियों ने क्या मांगा की; जानिए
तमिलनाडु होने वाले विधानसभा चुनाव एक चरण में होंगे? यह सवाल इसलिए उठ रहे
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बैठक में अधिकांश पार्टियों ने चुनाव एक ही चरण में कराने और चुनाव में धनबल व मुफ्त वितरण पर सख्त निगरानी की मांग की। आयोग ने भरोसा दिलाया कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी होंगे।
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तमिलनाडु में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की सियासत में गर्माहट बढ़ गई है। इसका बड़ा कारण है कि एक तरफ जहां चुनावी रण में राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है। वहीं दूसरी ओर अधिकतर राजनीतिक पार्टियों ने राज्य में होने वाले चुनाव को एक चरण में कराने की मांग की है। यह बात तब सामने आई है जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने गुरुवार को राजनीतिक पार्टियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश पार्टियों ने चुनाव एक ही चरण में कराने का अनुरोध किया।
इसके साथ ही बैठक में पार्टियों ने चुनाव में धनबल और मुफ्त चीज़ों के वितरण पर कड़ी निगरानी रखने की भी मांग की। बता दें कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस बैठक में ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर्चना पटनााइक और चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टी ने लिया हिस्सा
बता दें कि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों ने बैठक में हिस्सा लिया। इसमें आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भाजपा, सीपीआई(एम), कांग्रेस और नेशनल पीपुल्स पार्टी शामिल थीं। राज्य पार्टियों में एआईएडीएमके, डीएमके, डीएमडीके, नाम तमिझार काची और विदुथलाई चिरुथाइगल काची शामिल थीं।
पार्टियों ने चुनाव आयोग से क्या कहा?
बैठक में पार्टियों ने चुनाव आयोग से उड़नदस्ता दलों की संख्या बढ़ाने और चुनावी गड़बड़ियों पर कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि चुनाव की तारीख तय करते समय त्योहारों को ध्यान में रखा जाए।
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ज्ञानेश कुमार ने सभी पार्टियों को दिया आश्वासन
इसके साथ ही ज्ञानेश कुमार ने सभी पार्टियों को आश्वासन दिया कि चुनाव हमेशा कानून के तहत मुक्त, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जाएंगे और चुनाव आयोग प्रलोभन और गैरकानूनी गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई करेगा। गौरतलब है कि चुनाव अप्रैल में होने वाले हैं और राजनीतिक पार्टियां चाहते हैं कि सभी नियमों का पालन हो और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर रोक लगाई जाए।
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