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Supreme Court: सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के दो 40 मंजिला टावरों को गिराने का काम दो हफ्ते में शुरू करने का निर्देश, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Mon, 07 Feb 2022 04:09 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 07 Feb 2022 04:09 PM IST
सार

कोर्ट ने नोएडा सीईओ को 72 घंटे के भीतर सभी संबंधित एजेंसियों की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है, ताकि ट्विन टावरों को गिराने के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा सके।

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Supreme Court directs demolition of twin 40 storied towers of Supertech Emerald Court in Noida within two weeks 
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि सुपरटेक के एमराल्ड कोर्ट परियोजना के ट्विन टावर को गिराने का काम दो हफ्ते के भीतर शुरू किया जाए। जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने नोएडा के सीईओ को 72 घंटे के भीतर एक बैठक बुलाने का भी निर्देश दिया, जिसमें सभी संबंधित अथॉरिटी मौजूद रहें।

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पीठ ने कहा कि सीईओ नोएडा इस अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे, इस आदेश के दो सप्ताह बाद विध्वंस का काम शुरू नहीं होगा। साथ ही पीठ ने तीन हफ्ते में विध्वंस को लेकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने टावरों को गिराने के लिए अंतिम योजना बनाने और तोड़फोड़ करने की टाइमलाइन तैयार करने के लिए नोएडा के सीईओ को 72 घंटे में गेल समेत सभी अथॉरिटी के साथ बैठक करने के आदेश दिया है। पिछली सुनवाई में दोनों टावरों को गिराने के लिए नोएडा अथॉरिटी द्वारा प्रस्तावित एजेंसी एडिफिस को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी।
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सोमवार को सुनवाई के दौरान नोएडा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रविंदर कुमार ने पीठ से कहा कि ट्विन टावर को गिराने को लेकर सभी अथॉरिटी की ओर से एनओसी मिल गई है। कुमार ने कहा कि सुपररेक द्वारा टावर को डहाने वाली एजेंसी एडिफिस के नाम जारी 70 लाख रुपए का चेक कुछ शर्त से साथ दी गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चेक के साथ कोई शर्त नहीं होगी। चेक मंगलवार को क्लियर हो जाना चाहिए।
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वहीं, सुपरटेक की ओर से पेश वकील ने कहा कि ट्विन टावर से करीब पांच मीटर की दूरी पर गैस पाइप लाइन है, जिसमें  बहुत अधिक प्रेशर हैं। ढहाने के क्रम में पाइप लाइन को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए गेल इंडिया से एनओसी की दरकार है। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि किसी भी अथॉरिटी द्वारा एनओसी देने से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि अदालत ने ट्विन टावर को गिराने का आदेश दिया है।

नोएडा के वकील ने पीठ को बताया कि डहाने के काम के समय यातायात सहित अन्य चीजों को लेकर यातायात पुलिस सहित गौतमबुद्ध नगर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है। सुनवाई के दौरान ट्विन टावर के पास स्थित एटीएस सोसाइटी की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि ढहाने की कार्रवाई में उसके हितों का भी ख्याल रखा जाना चाहिए, लेकिन पीठ ने इस पर विचार करने से इनकार कर दिया।


मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें भवन मानदंडों के उल्लंघन के लिए सुपरटेक के नोएडा एक्सप्रेस स्थित एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के 40 मंजिले ट्विन टावर-16 (अपेक्स) और 17 (स्यान) को ढहाने का आदेश दिया गया था। सुपरटेक को तीन महीने के भीतर टावरों को गिराने का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया था। 

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