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रणनीति: परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भर भारत की छलांग, निजी कंपनियों को यूरेनियम खनन की मिली इजाजत
Thu, 14 Aug 2025 06:36 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Thu, 14 Aug 2025 06:36 AM IST
सार
केंद्र सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार निजी भारतीय कंपनियों को यूरेनियम के खनन, आयात और प्रसंस्करण की अनुमति दी है। यह कदम 2047 तक परमाणु उत्पादन क्षमता 12 गुना बढ़ाने के लक्ष्य की ओर अहम पहल है। इससे ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
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परमाणु ऊर्जा संयंत्र
- फोटो : पीआईबी
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विस्तार
केंद्र सकार ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़े बदलाव का फैसला किया है। अब निजी भारतीय कंपनियों को यूरेनियम के खनन, आयात और प्रसंस्करण की अनुमति दी जाएगी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 12 गुना बढ़ाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का हिस्सा है।
सरकार की इस पहल से देश के परमाणु कार्यक्रम में अरबों डॉलर का निवेश आने की उम्मीद है। इससे ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। सरकार का अनुमान है कि 2047 तक परमाणु ऊर्जा भारत की कुल बिजली जरूरतों का 5 फीसदी पूरा करेगी। वर्तमान में, परमाणु क्षेत्र पर पूरी तरह से सरकार का नियंत्रण है, इसमें यूरेनियम का खनन, आयात और प्रसंस्करण शामिल है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और रणनीतिक महत्व को देखते हुए, यूरेनियम के व्यय, ईंधन के पुनर्संसाधन और प्लूटोनियम अपशिष्ट के प्रबंधन पर सरकार का नियंत्रण बरकरार रहेगा। यह वैश्विक मानदंडों के अनुरूप है, जहां परमाणु सामग्री के दुरुपयोग और विकिरण सुरक्षा पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।
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निजी भागीदारी निभाएगी महत्वपूर्ण भूमिका
देश में यूरेनियम के सीमित भंडार (लगभग 76,000 टन) हैं, जो मौजूदा अनुमानों के अनुसार, केवल 25 फीसदी बढ़ी हुई मांग को ही पूरा कर पाएंगे। शेष 75 फीसदी मांग को पूरा करने के लिए आयात और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाना अनिवार्य है। निजी क्षेत्र की भागीदारी इस कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कनाडा, अमेरिका, द. अफ्रीका की फेहरिस्त में शामिल होगा भारत
सरकार की यह पहल भारत को कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा कर देगी, जहां निजी फर्मों को यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण की अनुमति है। यह कदम भारत के परमाणु कार्यक्रम को एक नई दिशा देगा और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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मौजूदा कानूनों में करना होगा संशोधन
इस नीति को लागू करने के लिए सरकार को कई मौजूदा कानूनों में संशोधन करना होगा, जिसमें खनन और बिजली क्षेत्र से संबंधित कानून शामिल हैं। उम्मीद है कि इस वित्तीय वर्ष में ही एक नियामक ढांचा तैयार कर सार्वजनिक किया जाएगा।
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सरकार की इस पहल से देश के परमाणु कार्यक्रम में अरबों डॉलर का निवेश आने की उम्मीद है। इससे ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। सरकार का अनुमान है कि 2047 तक परमाणु ऊर्जा भारत की कुल बिजली जरूरतों का 5 फीसदी पूरा करेगी। वर्तमान में, परमाणु क्षेत्र पर पूरी तरह से सरकार का नियंत्रण है, इसमें यूरेनियम का खनन, आयात और प्रसंस्करण शामिल है।
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सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और रणनीतिक महत्व को देखते हुए, यूरेनियम के व्यय, ईंधन के पुनर्संसाधन और प्लूटोनियम अपशिष्ट के प्रबंधन पर सरकार का नियंत्रण बरकरार रहेगा। यह वैश्विक मानदंडों के अनुरूप है, जहां परमाणु सामग्री के दुरुपयोग और विकिरण सुरक्षा पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।
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निजी भागीदारी निभाएगी महत्वपूर्ण भूमिका
देश में यूरेनियम के सीमित भंडार (लगभग 76,000 टन) हैं, जो मौजूदा अनुमानों के अनुसार, केवल 25 फीसदी बढ़ी हुई मांग को ही पूरा कर पाएंगे। शेष 75 फीसदी मांग को पूरा करने के लिए आयात और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाना अनिवार्य है। निजी क्षेत्र की भागीदारी इस कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कनाडा, अमेरिका, द. अफ्रीका की फेहरिस्त में शामिल होगा भारत
सरकार की यह पहल भारत को कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा कर देगी, जहां निजी फर्मों को यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण की अनुमति है। यह कदम भारत के परमाणु कार्यक्रम को एक नई दिशा देगा और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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मौजूदा कानूनों में करना होगा संशोधन
इस नीति को लागू करने के लिए सरकार को कई मौजूदा कानूनों में संशोधन करना होगा, जिसमें खनन और बिजली क्षेत्र से संबंधित कानून शामिल हैं। उम्मीद है कि इस वित्तीय वर्ष में ही एक नियामक ढांचा तैयार कर सार्वजनिक किया जाएगा।